Saturday, October 21, 2017
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गाँव ,गरीब और किसानो का बजट

amit1विपक्षजिस सरकार को सूट बूट की सरकार कहते हुए बदनाम कर रहा था , उस सरकार ने अपना तीसरा तथा दूसरा सम्पूर्ण बजट गरीबो, दलितों  और किसानो के लिए प्रस्तुत किया। विपक्ष को हालांकि ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया कि वो बजट को लेकर विरोध में तहलका मचा सके। हाँ, विरोध करना उनका कार्य है इसलिए विरोध के नाम पर वे मध्यम वर्ग को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं। मध्यम वर्ग हो या उच्च वर्ग उन्हें यह ध्यान में रखना होगा कि इस देश में गरीब , दलित और किसान भी रहते हैं , जिन्हे बजट में अब तक कभी प्राथमिकता नहीं दी गयी थी।  नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने इस बजट को लगभग ३० फीसदी गरीबो , किसानो के नाम किया है।  अमीरो या कार्पोरेट सेक्टर को लाभान्वित नहीं किया गया है और माध्यम वर्ग के लिए स्थिति को लगभग सामान्य रखा गया है।  यह सर्व विदित है कि देश में गाँवों , किसानो और गरीबों की हालत दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है , और उन्हें राहत देने , उन तक सुविधाएं पहुंचाने का पुरजोर तरीके से प्रयास इस बजट में किया गया है। लिहाजा कहा जा सकता है कि जेटली का बजट कृषि प्रधान बजट है।  और देश को इसकी ज्यादा जरुरत थी।
JAITLEY-BUDGET-Lअपने बजटीय भाषण का प्रारम्भ अरुण जेटली ने जिस कविता से किया उससे स्पष्ट था कि जेटली का बजट अब तक के बजट से भिन्न होगा।  वैसे तो इस बजट पर कार्पोरेट घरानो , अमीरों  तथा मध्यम  वर्ग की पैनी नज़र थी किन्तु उन्हें निराश ही होना पड़ा।  हालांकि यह निराशा इतनी कठोर या गहरी भी नहीं है कि अच्छे दिनों की आस छोड़ दी जाय।  अच्छे दिन जमीन से पैदा किये जाने है।  आसमान से तोड़े नहीं जा सकते और मोदी सरकार ने जमीन यानी खेत -खलिहान और इससे सम्बंधित वर्ग को प्राथमिकता दी। यकीनन बजट के प्रावधानों को जब आकार मिलेगा गाँव , गरीब और किसानो को लाभ पहुंचेगा , इस लाभ का असर मध्यम वर्ग को होगा और अमीरों को भी।
यदि गाँव , किसान , दलित , खेती , ढांचागत सुविधाओं के विकास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बजट में प्रधान रखा गया है तो इस पर तालियां ही बजानी चाहिए न कि रोना -धोना।  विपक्ष आखिर क्यों भूल जाता है कि बजट का मतलब सिर्फ मध्यम  वर्ग या अमीरों की सुख- सुविधाओं की पूर्ति का ही नहीं है बल्कि  बजट जब तक देश की उस जनता तक अपना लाभ न पहुंचाए जिसकी मेहनत और पसीने से मिडिल और अपर वर्ग शेखी बघारता दिखता है तब तक उसकी सार्थकता नहीं है। कहने को बजट का विरोध करना आसान है। क्योंकि बजट में ऐसा कुछ नहीं है जिसे आमूलचूल परिवर्तन करार दिया जा सके।  किन्तु बजट में है , बजट में है वो तबका जिसके उत्थान के लिए पहली बार किसी सरकार ने न केवल सोचा है बल्कि उसके लिए कदम भी उठाए हैं। रसोई गैस कनेक्शन के लिए बड़े अभियान की घोषणा करना और उन महिलाओं तक गैस कनेक्शन पहुंचाना जो आज भी चूल्हे में अपनी सांस फूंक रही हैं तो इसे सरकार का सराहनीय कदम माना  जाएगा। प्रत्येक परिवार को एक लाख रूपए तक का स्वास्थ्य कवर प्रदान करने के लिए यदि इस सरकार ने नई स्वास्थ्य सुरक्षा योजना बनाई है तो इसे स्वस्थ भारत की ओर उठाया गया कदम माना  जाना  चाहिए। युवाओं के लिए भी बजट में खासा ध्यान रखा गया है।  करीब एक करोड़ युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रम का लाभ मिलेगा। इसके  तहत उन्हें प्रक्षिशित किया जाएगा यानी अगले तीन वर्ष में बजटीय प्रभाव से प्रधानमंत्री कौशल योजना का लक्ष्य करीब १५०० बहु कौशल प्रशिक्षण संस्थान स्थापित कर एक करोड़ युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन्हें रोजगार के मार्ग प्राप्त किये जा सकेंगे। वहीं अप्रैल २०१६ से मार्च २०१९ के मध्य प्रचालन प्रारम्भ करने वाले स्टार्ट अप कंपनियों को पांच वर्षों में से तीन वर्षों तक अर्जित किये गए लाभ पर शत प्रतिशत कर कटौती का लाभ प्रदान किया जाएगा। दरअसल जेटली के  बजट ने कृषि , गाँव , गरीब और छोटे कर दाताओं के मद्देनजर कई सारे फैसले लिए हैं। मिडिल वर्ग के लिए आयकर की सीमाओं को छेड़ा नहीं गया है। मोटा मोटी तौर पर अगर सस्ती -महंगी चीजो पर नजर डालें तो दिव्यांगों के उपकरण , छोटे घर ,पहली बार घर खरीदने वालों को जिसमे ५० लाख से अधिक की कीमत वाला घर न हो तो ५० हजार रुपये की छूट , इलेक्ट्रिक मोटर्स , इलेक्ट्रिक कारें , कोल्ड स्टोरेज , कोल्ड रूम इत्यादि  सस्ते हुए हैं।  और  सिगरेट , सिगार , गुटखा , १० लाख से अधिक कीमतों की कारें , सोने के गहने , ब्रांडेड कपडे,हवाई सफर इत्यादि महंगी की लिस्ट में हैं।  निश्चित रूप से उच्च वर्ग के लिए यह बजट निराश करता है किन्तु जैसा कि इस सरकार की पहली प्राथमिकता गाँवों के विकास, खेती का विकास, किसानो की समस्याओं का हल तथा दलित उत्थान  के लिए विशेष कार्य हैं , उसमे जेटली के बजट को १०० में से ९५ अंक दिए जाने चाहिए। देश में आज जरुरत इसी बात की है कि किसान खुशहाल रहें , गरीब रोजगार पाए और गाँवों , खेतो तथा सिंचाई का मार्ग प्रशस्त हो। अगर गाँव गाँव तक बिजली पहुंचाने की सफल कोशिश है तो यह हमारे देश के लिए खुशी की बात है।  अगर देश के विकास की बात पर जिन लोगो ने मोदी सरकार को चुना है तो वे निश्चित रूप से अपने निम्न तबके की खुशहाली का भी सोच रखते हैं।  और इस बजट में जेटली ने उसी तबके के लिए अपने कदम प्रमुखता से उठाये हैं जिसकी तारीफ़ की जानी चाहिए।

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