Wednesday, December 13, 2017
अभी अभी

दाल में काला है , उसे पकड़िए ! 

क्या घुमड़ आए फिक्सिंग के बादल?
ईसीसी के आसमान पर मैच फिक्सिंग के बादल घुमड़ आए लगता है। क्रिकेट में फिक्सिंग नहीं हो सकती , ऐसा कहा नहीं जा सकता और ऐसे बड़े टूर्नामेंट में वो भी इंग्लैण्ड में और उस पर पाकिस्तानी टीम मैदान पर हो तो , सबकुछ संभव है। यदि यह कहा जा रहा हो कि क्रिकेट में सबकुछ सम्भव है , कब कौनसी टीम किस प्रकार जीत या हार जाए , अंतिम गेंद तक दावे के साथ नहीं कह सकते तो यह भी कहा जा सकता है कि कब किस टीम को किस प्रकार जितवाना है या हरवाना है , तो यह भी सम्भव है।  यूं तो कार्डिफ के सोफिआ पार्क में श्रीलंका और पाकिस्तान के बीच एक दिलचस्प मैच देखने को मिला। किन्तु जिस टीम ने भारत जैसी मजबूत टीम को हरा रखा हो वो पाकिस्तान जैसी कमजोर टीम के सामने धाराशाई हो जाएगी , ये बात हजम होने जैसी तो नहीं लगती। और तब जब आसानी से मैच को अपने पक्ष में किया जा सकता हो।  देखने के लिए तो कभी मैच श्रीलंका के पक्ष में रहा तो कभी पाकिस्तान के पक्ष में मगर इसके नेपथ्य में कौनसा खेल खेला गया , इसकी संभावनाएं मैच का जिस अंदाज़ में निकला  परिणाम है उसे देखकर व्यक्त की जा सकती है। बहुत आसान है यह कहना कि पाकिस्तान ने इस मैच को तीन विकेट से जीत लिया। 237 रन का  पीछा करते हुए पाकिस्तान 44.5 ओवरों में ही विजय लक्ष्य पर पहुच गया। पाकिस्तान की तरफ से कप्तान सरफ़राज़ अहमद सबसे ज्यादा 61 रन बनाकर नॉट आउट रहे।  सलामी बल्लेबाज फखर ज़मान ने तेज खेलते हुए 36 गेंदों पर 50 रन बनाये।  ये एक मैच समरी है और बिलकुल उस तरह जिस तरह से मैच के बाद व्यक्त की जाती है।  किन्तु इस मैच से जो काले काले बादल उठ खड़े हुए हैं , उसका क्या। हालांकि न तो आईसीसी मानने वाली और न ही क्रिकेट खेल के वो आकालोग जो इस खेल से जुड़ कर अपनी अपनी कमाई में लगे हुए हैं। सबूत चाहिए।  कम से कम ये तो सम्भव बनाया जा सकता है कि इस मैच की ईमानदारी से जांच की जाए। पर कराएगा कौन ? और कौन इसकी शिकायत करेगा ? यकीन मानिये अगर फाइनल में भारत बनाम पाकिस्तान का मैच देखने को मिलेगा तो शत प्रतिशत ये मैच फिक्स ही होगा। यही नहीं तब तो होने वाले दो अन्य मैच भी फिक्स कहे जाएंगे। क्योंकि चैम्पियंस ट्राफी के समीकरण कुछ इस प्रकार बनते नज़र आते हैं कि फाइनल में भारत और पाकिस्तान पहुंचे। इससे कई तरह के लाभ है।  पहला और सबसे बड़ा लाभ तो यही कि इस मैच से करोड़ों -अरबो रुपयों के वारे-न्यारे हो सकते हैं।  और वैसे भी क्रिकेट एक खेल जितना है उससे अधिक वो एक व्यापार है।  तो सौदेबाजी न हो , सम्भव  ही नहीं।  और जिस अंदाज में आईसीसी अपने दर्शको की कमी महसूस  कर रहा है वो भी गौर करने वाला प्वाइंट  है।  उन तमाम मैचों में जिसमे  भारत या पाकिस्तान नहीं खेले , स्टेडियम अपेक्षानुसार नहीं भरे। अब जबकि अंतिम तीन मैच बचें हैं , तो आयोजक को भारत और पाकिस्तान का लाभ उठाना है।  और वो किसी भी कीमत पर उठाएगा।  यही लाभ उठाने की मंशा व्यापार में फिक्सिंग की शंका को भी जन्म देती है।
बहरहाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के मुकाबले में देखिये फिक्सिंग हो सकने के संकेत। ये तो सही है कि श्रीलंका की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम का स्कोर जब 26 रन था तब सलामी बल्लेबाज दनुष्का गुणातिलका सिर्फ 13 रन बनाकर आउट हो गए।  83 रन पर श्रीलंका ने तीन विकेट गवां दिए थे लेकिन चौथे विकेट के लिए कप्तान एंजेलो मैथ्यूज और निरोशन डिकवेला के बीच 78 रन की साझेदारी हुई। श्रीलंका का स्कोर जब 161 रन था तब मैथ्यूज 39 रन बनाकर आउट हुए।  अगले छह रन में श्रीलंका ने तीन विकेट गवां दिए यानी 167 रन पर श्रीलंका ने सात विकेट खो दिए थे।  ऐसा लग रहा था कि श्रीलंका 200 रन तक पहुंच नहीं पायेगा लेकिन आठवें विकेट के लिए सुरंगा लकमल और असेला गुणरत्ने के बीच 46 रन की साझेदारी हुई। आठवें विकेट के रूप में लकमल 26 रन बनाकर आउट हुए तब श्रीलंका का स्कोर 213 रन था।  श्रीलंका 49.5 ओवर में 236 रन बनाकर ऑल आउट हो गया। ये तो श्रीलंका की कहानी रही।  अब देखिये पाकिस्तान की। पाकिस्तान की शुरुआत अच्छी रही।  पहले विकेट के लिए फखर ज़मान और अज़हर अली के बीच सिर्फ 11.2 ओवरों में 74 रन की साझेदारी हुई। पहले विकेट के रूप में फखर 50 रन बनाकर आउट हुए। लेकिन अगले 63 रन पर पाकिस्तान ने पांच विकेट गवां दिए यानी 137 रन पर पाकिस्तान ने छह विकेट गवां दिए थे। पाकिस्तान का स्कोर जब 162 रन था तब इमाद वसीम चार रन बनाकर आउट हो गए।  अब यहां से ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान इस मैच को हार जायेगा। पाकिस्तान को जीतने के लिए 75 रन बनाने थे और हाथ में सिर्फ तीन विकेट थे।  धीरे-धीरे कप्तान सरफ़राज़ अहमद और मोहम्मद आमिर के बीच साझेदारी बढ़ती गई। 39 ओवर में मलिंगा की गेंद पर थिसारा परेरा ने सरफ़राज़ अहमद का एक आसान सा कैच छोड़ दिया।  तब पाकिस्तान का स्कोर 193 रन था और सरफ़राज़ अहमद 38 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे।  फिर मलिंगा के अगले ओवर में एस प्रसन्ना ने सरफ़राज़ अहमद का कैच छोड़ा तब पाकिस्तान का स्कोर 198 रन था। महत्वपूर्ण समय में दो कैच ड्रॉप करना श्रीलंका के लिए भारी पड़ा और श्रीलंका इस मैच को हार गया। है न जीत-हार की बहुत आसान सी कहानी। मगर क्या ऐसा ही हुआ होगा ? जो टीम आसान से तीन कैच छोड़ दे।  जो टीम रन  आउट के आसान अवसर छोड़ दे।  जो टीम जीता हुआ पूरा मैच विरोधी टीम को सौंप दे। क्या इतने बड़े टूर्नामेंट में ये सब सम्भव है ? सोचने वाली बात है। संदेह करने जैसी बात है। गौर से देखिये , 30 ओवरों के बाद श्रीलंका के हाथ से मैच निकलता चला गया।  एक तरफ श्रीलंका के गेंदबाज सरफ़राज़ और आमिर के ऊपर कोई असर नहीं डाल पा रहे थे तो दूसरी तरफ श्रीलंका अतिरिक्त रन देता चला गया।  श्रीलंका ने अपनी पारी में 23 अतिरिक्त रन दिए जिसमें चार बाई, छह लेग बाई और 13 वाइड शामिल थे।  श्रीलंका की तरफ से लसिथ मलिंगा और थिसारा परेरा ने 4-4 वाइड गेंदें फेंकीं जबकि नुवान प्रदीप ने तीन और लकमाल ने दो वाइड गेंदें फेंकीं। श्रीलंका की ख़राब गेंदबाजी की वजह से आठवें विकेट के लिए सरफ़राज़ अहमद और मोहम्मद आमिर के बीच 75 रन की साझेदारी हुई। क्या ये सब खेल में होता चला गया ? क्रिकेट की परिभाषा में ऐसा हो सकता है। किन्तु क्रिकेट की परिभाषा को बदलने के लिए आज पूरा माहौल है जो अपने तरह के दबाव बनाता है और परिणाम जैसा चाहे वैसा बदल सकता है।  इन्तजार कीजिये सेमीफाइनल के मैचों का। उसके परिणाम का।  इस तरह भी सोच कर जब मैच देखा और परखा जाएगा तो दाल में काला जरूर दिखेगा। काला पकड़िए।

-अमिताभ श्रीवास्तव

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