Saturday, August 19, 2017
अभी अभी

बहार नहीं , बाहर होंगे

camroonनई दिल्ली / यूरोपियन युनियन से बाहर होने के फायदे कम , हानि अधिक दिखती है और यह सब ब्रिटेन समझ भी रहा है। यह सच लग रहा है कि  यूरोपीय यूनियन से बाहर होने से ब्रिटेन के दूसरे देशों से राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल जाएंगे और ब्रिटेन को एक बार फिर से दुनिया के दूसरे देशों से नए एग्रीमेंट और समझौते करने पड़ेंगे। इसके अलावा ब्रिटेन में होने वाले अगले चुनाव में वर्तमान प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को भी इस बदलाव का खमियाजा भुगतना पड़ेगा और उन्हें अगले चुनाव में हार  का मुंह देखना पड़ सकता है। राजनीतिक विश्लेषक और राजस्थान विश्वविद्यालय स्थित दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र के पूर्व निदेशक डॉ. कृष्ण गोपाल ने बताया ब्रिटेन के ईयू से अलग होने का असर भारत सहित पूरे दक्षिण एशियाई देशों पर पड़ेगा। कैमरन ने कहा कि ईयू से ब्रिटेन के अलग होने के फैसले के बाद प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि वह जनता के फैसले का सम्मन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर भी घोषणा की। कैमरन ने कहा, ‘मैं अभी तीन महीने तक पीएम पद पर बना रहूंगा। इसके बाद अक्टूबर से शुरू हो रही कंजर्वेटिव पार्टी की कॉन्फ्रेंस में वह पद से इस्तीफा देंगे और इसके बाद नए प्रधानमंत्री पद संभालेंगे।

जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने जनमत संग्रह के दौरान ईयू में रहने की वकालत की और लोगों से इसके पक्ष में ही वोट करने की अपील की थी, लेकिन ब्रिटेन की जनता ने प्रधानमंत्री कैमरन की अपील को अनसुना करते हुए यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के लिए मतदान किया। इस जनमत संग्रह से एक बात तो साफ है कि लोग बदलाव के पक्ष में थे और बाहर होना चाहते थे। इसका असर ब्रिटेन के अगले आम चुनाव में भी देखा जा सकता है और वहां की जनता कैमरन को भी बाहर का रास्ता दिखा सकती है। इसके अलावा दुनिया के सारे बड़े नेता ब्रिटेन को ईयू में ही देखना चाहते थे, लेकिन वहां की जनता ने बाहर होने का फैसला किया। इस फैसले के बाद ब्रिटेन की सरकार को फिर से दुनिया के बड़े देशों से नए सिरे से समीकरण साधने होंगे, जो आसान नहीं है।ब्रिटेन के ईयू से बाहर होने के बाद कई अन्य देश भी यूरोपीय यूनियन से बाहर होने की मांग उठा सकते हैं। इनमें जर्मनी और नॉर्वे प्रमुख रूप से हो सकते हैं। जर्मनी पहले भी ग्रीस के मुद्दे पर इस तरह की पहल कर चुका है। वहीं शरणार्थियों के मामले में भी कई देश अपनी खुली सीमाओं को सील कर चुके हैं। अगर ऐसे ही माहौल चला तो एक यूरोप का सपना ज्यादा दिन नहीं चलेगा और हो सकता है आने वाले देशों में फिर से सारे देश अलग हो जाए।

जानकारी के अनुसार कई भारतीय कंपनियों के मुख्यालय ब्रिटेन में हैं और वे वहां ईयू में टैक्स फ्री के चलते अपने व्यापार को कर रही थीं, लेकिन अब ब्रिटेन के ईयू से अलग होने से वहां की सरकार अपनी आय बढ़ाने के लिए अपने टैक्स आदि लगाएगी तो भारतीय कंपनियों को भी दूसरे देशों में अपनी जग तलाशनी होगी। हो सकता है कंपनियां ईयू के दूसरे देशों में अपने कार्यालय स्थापित करें। 

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