Saturday, October 21, 2017
अभी अभी

​खेल राजनीति का यही शास्त्र है शास्त्री जी ​

ravi-shastri-sourav-gangulyजबअनिल कुंबले भारतीय टीम के कोच बने तो चारों ओर  से इस फैसले की तारीफें सुनाई दी , किन्तु एक शख्स ऐसा था जिसके हाथ ताली नहीं बजा रहे थे बल्कि उसने तो अपनी भौहें तरेर रखी थी, मानो कुंबले को यह पद मिलना ही नहीं था , ये गलत फैसला था।  फिर कौन होता कोच ? वो खुद।  जी हाँ, वो ओर कोई  नहीं अपने रवि शास्त्री हैं जो इन दिनों खफा हैं।  खफा इसलिए कि वो कोच नहीं बनाये गए और गुस्सा इसलिए कि सौरव गांगुली ने उनके कोच बनने के रास्ते पर कांटे बिछा दिए। सचमुच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड  की चाशनी ही ऐसी है कि जीभ लपलपाती  ही रहती है । रवि शास्त्री पिछले कई समय से टीम के साथ हैं।  उनका यह काल भी शानदार रहा बावजूद इसके मन है कि मानता नहीं।  एक बेहतरीन निर्णय को भी दरकिनार रखते हुए वे अपनी नाराजगी जाहिर कर रहें हैं और गांगुली पर गुस्सा उढ़ेल  रहें हैं।  वैसे जैसी करनी  वैसी भरनी की कहावत यहां भी चरितार्थ होती है।  शास्त्री और गांगुली के बीच कभी मधुर सम्बन्ध रहे हों ऐसा चर्चा में नहीं आया। कॉमेंटेटर के रूप में शास्त्री ने अपनी आजादी और अपने काम का पूरा फायदा उठाते हुए गांगुली को उनका सम्मान तथा उनका स्थान नहीं दिया। खैर चुपचाप सुनते -सहते गांगुली रिटायर होने के बाद भी क्रिकेट को अपना योगदान देते रहे और स्थिति यह आ गयी कि क्रिकेट मैदान से बाहर होकर भी  क्रिकेट के मंच पर आज वो अहम किरदार की शक्ल में है और शास्त्री उनकी प्रतिक्रिया के गुलाम। ऐसा ही कुछ नज़ारा तो है अन्यथा रवि शास्त्री कोच न बन सके तो अनिल  कुंबले   के कोच बनने पर दिल खोल कर बधाई तो देते। यह तो एक प्रक्रिया है जिसमे हार-जीत या किस पर कितना भरोसा या कौन कितना लायक हो  सोचा जाता है। वो  किसी पर अपना गुस्सा तो नहीं उतारते। खेल भावना की तरह इस फैसले को लेते तो बात समझ में भी आती।  गांगुली को इसका दोष तो नहीं देते।  यह जाहिर तो नहीं होने देते कि गांगुली ने उनसे एक तरह से बदला लिया है।  जी हाँ , रवि की बयानबाजी से ऐसी ही सोच  बाहर निकल कर आ रही  है जिसने रवि-गांगुली को आपस में भिड़ा रखा है।
कहने वाले कहते हैं कि गांगुली को कॉमेंटेटर के रूप में शास्त्री ने कभी सम्मानजनक श्रेय नहीं दिया , लिहाजा कोच की प्रक्रिया के वक्त गांगुली ने भी दमदार स्क्वेयर ड्राइव मारा और शास्त्री के मंसूबो को नेस्तनाबूद कर दिया।  खेल हलकों में चर्चा है कि रवि शास्त्री कहते हैं राष्ट्रीय कोच की इच्छा रखने वाले गांगुली उनकी स्थिति को कमजोर करना चाहते थे। जो हो पर अब तो कुंबले कोच कमान संभालेंगे और शास्त्री अपने आगे के भविष्य के तानेबाने बुनेंगे और गांगुली मैदान से बाहर जिस अंदाज़ में खेल रहे हैं उसे देखते हुए तो यही लगता है आने वाला भविष्य गांगुली का बेहतर है। बहरहाल, शास्त्री को गांगुली की वजह से बाहर होना पड़ा या न होना पड़ा यह अलग बात है मगर अनिल कुंबले का कोच बनना सबसे सही फैसला है , इससे किसीको कोइ गुरेज नहीं। और जब बात किसी चुनाव की हो तो राजनीति का शास्त्र तो यही कहता है कि किसका पत्ता कैसे साफ़ हो।

  • अमिताभ श्रीवास्तव 

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