Saturday, August 19, 2017
अभी अभी

Category Archives: दो टूक

क्या ओलम्पिक के लायक है भारत ?

कौन नहीं चाहेगा कि ओलम्पिक जैसा खेलों का महा आयोजन भारत में भी हो। किन्तु क्या इसके लायक है भारत ? प्रश्न यही है।  क्योंकि ओलम्पिक आयोजित कराना न केवल टेढ़ी खीर है बल्कि देश की इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है कि क्या वो दुनिया को अपने यहां आमंत्रित कर पाएगा ? हालांकि ओलम्पिक भारत में हो ऐसा स्वप्न ... Read More »

डोलती महाराष्ट्र की राजनीति

जब कभी किसी चुनाव में किसी एक दल को बहुमत नहीं मिलता तब अक्सर उन्हें बल मिल जाता है जिसके पास न तो कोई आधार होता है , न ही जनाधार।  यानी कम सीटें जीतने वाली पार्टी बब्बर शेर बन जाती है और निर्दलीय चुनकर आने वाले इक्का -दुक्का उम्मीदवार किसी सोने की चिड़िया की तरह नजर आने लगते हैं। ... Read More »

IPL का पानी और प्यासे गले

संवेदनाओ की कमी और इसी कमी के चलते धंधेबाजों ने अपनी जेबें भरी है।  धंधेबाजों के लिए संवेदनाएं दो कोढ़ी की चीज है। आईपीएल विशुद्ध रूप से क्रिकेट का धंधा है।  मनोरंजन के नाम पर लूटा जाने वाला पैसा।  निश्चित रूप से ऐसे  आयोजन के प्रेमियों को यह बात कड़वी लगेगी, अगर सचमुच कड़वी लगेगी तो संवेदना से भरे हुए व्यक्ति ... Read More »

गाँव ,गरीब और किसानो का बजट

जिस सरकार को सूट बूट की सरकार कहते हुए बदनाम कर रहा था , उस सरकार ने अपना तीसरा तथा दूसरा सम्पूर्ण बजट गरीबो, दलितों  और किसानो के लिए प्रस्तुत किया। विपक्ष को हालांकि ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया कि वो बजट को लेकर विरोध में तहलका मचा सके। हाँ, विरोध करना उनका कार्य है इसलिए विरोध के नाम पर ... Read More »

देशभक्ति , देशद्रोह और विवाद

देशद्रोह और विवाद,पिछले एक हफ्ते से ज्यादा समय से इस  विषय ने भारत की फिजाँ को खराब कर रखा है। देशभक्ति और देशद्रोह के मामले में क्या राजनीति , क्या मीडिया और क्या जनता , सब दो धड़ों में बंटे  हुए हैं।  लगभग सारे खुद को देशभक्त साबित करने पर तुले हैं और दूसरों को  कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। जब सारे ... Read More »

क्या ओवैसी और मोदी में दोस्ती होगी?

 दो अलग अलग विचारधाराओं की नदियां है , इनका संगम लगभग नामुमकिन है , किन्तु यह भी सच है कि अगर संगम हो जाता है तो यकीनन देश के  राजनीतिक सागर में तूफ़ान आ जाएगा।  यह किसी ग्लेशियर के पिघलने जैसा है जो कांग्रेस के खात्मे के लिए काफी है। अगर आप राजनीतिक समीकरणों की बात करें तो कुछ भी संभव ... Read More »

बस राजनीतिक बाहु में बल चाहिए

रात से नींद नहीं आ रही है। बार बार जेहन में पठानकोट आपरेशन गूँज रहा है।  गूँज रहा है यह  प्रश्न कि आखिर कब तक हम दो कौड़ी के आतंकवादियों को मारने के लिए अपने अमूल्य फौजी गंवाते रहेंगे? कब तक शान्ति की इस पहल में अपने जाबांजों को दांव पर लगाया जाता रहेगा? देश के जनमानस की तरह ही यह प्रश्न ... Read More »

विकास के आड़े आता विरोध

आश्चर्य नहीं कि नरेंद्र मोदी सरकार अपने पांच साल पूरे करते करते घोर विरोध में घिर कर देश की जनता के सामने ऐसी प्रतीत हो जैसे उसने देश की उम्मीदों को ठगा हो।  क्योंकि जिस गति से देश के विकास विरोधीजन मोदी सरकार पर निशाना साधे जा रहे हैं , संसद को चलने नहीं दे रहे , नित नए नए फिजूल के ... Read More »

गलती कोर्ट की नहीं

खान पर आये उच्च न्यायालय के फैसले ने एक अजीब तरह की बहस छेड़ दी। सोशल मीडिया पर लोग इसे अदालत की या न्याय की गलती तक मान रहे हैं। किन्तु उच्च न्यायालय का फैसला शत प्रतिशत सही है और इसे मान्य करना ही होगा क्योंकि जितने सबूत सलमान के खिलाफ एकत्र कर पेश किये गए वे तमाम सलमान को दोषी नहीं ... Read More »

ये क्रिकेट भी कोई क्रिकेट है

हास्यास्पद है कि पेरिस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के नवाज शरीफ के मध्य हुई तीन मिनिट की मुलाक़ात में क्रिकेट के आकाओं तथा खेल पत्रकारों ने यह कहना शुरू कर दिया कि दोनों के बीच दोनों देशो के क्रिकेट मैच को कराने सम्बंधित कोई बात हुई होगी। सोचिये ,पेरिस में दोनों राष्ट्राध्यक्ष क्रिकेट की बात करेंगे ? दुनिया  में इसके ... Read More »