Wednesday, December 13, 2017
अभी अभी

Category Archives: गजल

‘साहिर’ हर ज़हन में है

साहिर लुधियानवी एक ऐसा नाम जो शब्दों के अमृत सा युगो युगों तक बरसता रहेगा। उनकी जिंदगी और उनके कलाम अपने आप में अलहदा हैं।  उनकी रचनाओं में या उनके फ़िल्मी गीतों में छलकती है उनकी जिंदगी , उनकी मोहब्बत और उनकी वीरानी। आइये आज उनके कुछ कलाम को गुनगुनाते हैं।  मायूस तो  मायूस तो हूं वायदे से तेरे, कुछ ... Read More »

शहीद भगत का एक ख़त

कुलतार के नाम अंतिम पत्र सेण्ट्रल जेल, लाहौर 3 मार्च, 1931 प्यारे कुलतार, आज तुम्हारी आंखों में आंसू देखकर बहुत दुख पहुंचा। आज तुम्हारी बातों में बहुत दर्द था। तुम्हारे आंसू मुझसे सहन नहीं होते। बरखुरदार, हिम्मत से विधा प्राप्त करना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना। हौसला रखना, और क्या कहूं- उसे यह फिक्र है हरदम नया तर्ज़े-जफ़ा क्या है, ... Read More »

एक मजदूर हूँ

मैं भी इसी जीवन का दरपन जरुर हूँ अभी-अभी अंधियारा अभी-अभी नूर हूँ। लहर-लहर सपनों के सागर में गीत हैं ठहर-ठहर, दुनिया! मैं नशे में चूर हूँ। तुम भी इसी धरती के चाँदी के फूल हो मैं भी इस धरती की मिट्टी का नूर हूँ। जर्रा समझते हुए कुचलो न मुझको मैं भी किसी दुखियारी माँ का गुरुर हूँ। जीवन ... Read More »

दिल-ए-मजाज़

नज़्रे-दिल अपने दिल को दोनों आलम से उठा सकता हूं मैं क्या समझती हो कि तुमको भी भुला सकता हूं मैं! कौन तुमसे छीन सकता है मुझे, क्या वहम है! खुद ज़ुलैखा से भी तो दामन बचा सकता हूं मै दिल में तुम पैदा करो पहले मिरी सी जुरअतें और फिर देखो कि तुमको क्या बना सकता हूं मैं दफ़न ... Read More »

तुम ही तो थी माँ

    डॉ. जे पी श्रीवास्तव द्वारा लिखी ‘माँ ‘ पर एक श्रेष्ठ रचना ‘घर की रौनक , कुशल-खातरी तुम ही तो थी माँ सबकी सेवा, टहल -चाकरी , तुम ही तो थी माँ। आम-नीम , पीपल -बबूल के पेड़ों के जंगल में वैष्णव की तुलसी की क्यारी , तुम ही तो थी माँ। आगम-निगम , पुराण-उपनिषद, वेद, भागवत , ... Read More »