Saturday, October 21, 2017
अभी अभी

Category Archives: बातें किताबों की

शहीद भगत का एक ख़त

कुलतार के नाम अंतिम पत्र सेण्ट्रल जेल, लाहौर 3 मार्च, 1931 प्यारे कुलतार, आज तुम्हारी आंखों में आंसू देखकर बहुत दुख पहुंचा। आज तुम्हारी बातों में बहुत दर्द था। तुम्हारे आंसू मुझसे सहन नहीं होते। बरखुरदार, हिम्मत से विधा प्राप्त करना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना। हौसला रखना, और क्या कहूं- उसे यह फिक्र है हरदम नया तर्ज़े-जफ़ा क्या है, ... Read More »

कहानी नाटककार सिद्धू की…

मनीराम मेरे पिता के मुताबिक, आठ चैत्र मंगलवार तड़के समाधि में से निकलकर बाबा महेशदास ने उसको चरणदास के आने की अडवांस इंफर्मेशन दी। जब बग्गा सिंह सिंह की माँ बुड्ढी दाई गुलाबो ने आप आकर खबर दी, तब मेरा पिता नीचे गहराई में कुआं खोद रहा था। उसके लफ़्ज़ों में, बार-बार दोहराए लफ़्ज़ों में, ‘उधर आठ चैत्र मंगलवार का ... Read More »

फक्कड़ सिद्धू

सिद्धू किसी का दास नहीं! चरणदास होना तो बहुत दूर की बात है। पता नहीं, मां-बाप ने उसका नाम क्या सोचकर रखा था। दास-भावना उसके नजदीक नहीं पहुंची। वह तो निरा फक्कर है। सीधा-सादा-सा, खुले स्वभाव वाला बंदा। बेपरवाह! गांव के डांगर-बछड़े चराता-चराता दिल्ली आ धमका। और यहां भी ऐसे चलता फिरता है जैसे कोई खोई हुई गाय हो। सिर ... Read More »

डायरी के पन्नों से झांकता जीवन

जीवन के साथ -साथ चलती है डायरी। जीवन के बाद भी जिंदा रहती है डायरी। और उसमें लिखे फलसफे जी गई एक पूरी जिंदगी को साधती है। अमर रखती है। ये डायरी है, उसके पन्ने हैं और पन्नो पे लिखी इबारतें हैं, जिसमें जीवन है …जीवन की असलियत है…जीवन का संघर्ष है या कहे जीवन का पूरा निचोड है… 1. ... Read More »

बूझो तो उसका नाम

देखो वह सांवला जोशीला पहने सादी पेंट और जिस पर सफेद कमीज आंखों पर पहने मोटा चश्मा पैरों में पहने कपड़े के जूते और कंधे पर डाले झोला वह कौन ? मस्त, मनमोहन चाल से चला जाता बूझो तो उसका नाम। लोग कहते कि वह कॉलेज में बच्चों को इंग्लिश पढ़ाता पर बच्चे कहते कि वह हमें जीवन जीना सिखाता ... Read More »

‘द राइज ऑफ सुपरवुमन’

-डॉ. निचिते की लिखी किताब का जानी-मानी अदाकारा पल्लवी जोशी ने किया लोकार्पण -महिलाओं के आंतरिक गुणों का दोहन करके सुपरवुमन बनने को प्रेरित करती है किताब   मुंबई / डॉ. निचिते की इस पुस्तक को स्त्रीत्व के सार का वर्णन कहा जा सकता है और यह स्त्री होने के अनेक पहलुओं पर रोशनी डालती है। इस बारे में डॉ. ... Read More »

दास की कलम में है कुछ ख़ास अहसास

-अमिताभ श्रीवास्तव ह समीक्षा नहीं है , समीक्षा मैं कर भी नहीं पाता हूँ और किसकी समीक्षा करूँ ? जो अपने आप में ही सबकुछ बयां करती हो उसकी ? वैसे मेरा व्यक्तिगत मत है कि समीक्षा सिर्फ पुस्तकों के सन्दर्भ में दर्शाती है कि इसे पढ़ना चाहिए या नहीं ? यह पुस्तक प्रमोशन का काम भी करती है।   ... Read More »

बनारस की गलियां

अपनी आध्यात्मिकता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन आजकल ये पवित्र नगरी  अपनी आध्यात्मिकता के कारण नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के कारण चर्चा में हैं। क्योंकि लोकसभा चुनाव 2014 में यहां से नरेन्द्र मोदी और अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़ रहे हैं। पूरी दुनिया की मीडिया सहित तमाम करोड़ो लोगों की इस सीट पर पैनी निगाहें हैं। कहते हैं ... Read More »

हिंदी में ‘तकनीकी सुलझनें’

नोंदिन कंप्यूटर की उपयोगिता बढ़ती जा रही है। चाहे वो ऑफिस हो, दुकान हो, घर हो या चाहे वो गांव हो, या शहर या फिर कस्बा। बैशक आप कंप्यूटर के ज्यादा जानकार हो या नहीं, लेकिन कंप्यूटर की जरुरत अधिक हो गई है कि इसके बिना काम चलना मुश्किल हो गया है। कारण साफ है क्योंकि अधिकतर काम अब कंप्यूटर ... Read More »

हरियाणवी माटी की महक है ‘लोकगीतों का बुगचा’

त दिल्ली पुस्तक मेले की है। ढेरों ढेर पुस्तकों के बीच यह खोजना कि क्या पढ़ा जाए क्या नहीं लगभग कठिन होता है। किंतु स्टॉल-दर-स्टॉल जा रहा था कि अचानक मेरी निगाह” लोकगीतों का बुगचा” नामक किताब पर पड़ी और मैं ठिठका। मेरे हाथ खुद-व-खुद आगे बढ़ गए, क्योंकि लोकगीतों की किताबों में माटी की महक होती है। उत्सुकता से ... Read More »