Saturday, October 21, 2017
अभी अभी

Tag Archives: होली

‘घर-घर माँ होली आई है’

घर-घर उड़ै हे गुलाल माँ होली आई चून्दड़ तो ले दे नुआ टाण माँ होली आई घर-घर उड़ै हे गुलाल माँ होली आई जम्फर तो ले दे नुआ टाण माँ होली आई घर-घर उड़ै हे गुलाल माँ होली आई मेहंदी तो ले दे रचणी लाल माँ होली आई घर-घर उड़ै हे गुलाल माँ होली आई सैण्डल तो ले दे नुआ ... Read More »

फागण के दिन चार री सजनी

फागण के दिन चार री सजनी, फागण के दिन चार मध जोबन आया फागण मैं फागण बी आया जोबन में झाल उठे सैं मेरे मन मैं जिनका बार न पार री सजनी, फागण के दिन चार। प्यार का चन्दन महकन लाग्या गात का जोबन लचकन लाग्या मस्ताना मन बहकन लाग्या प्यार करण नै तैयार री सजनी, फागण के दिन चार। ... Read More »

जिसको चाहो उसे आज वर लो

यह मिट्टी की चतुराई है रुप अलग औ रंग अलग भाव, विचार, तरंग अलग हैं ढाल अलग है ढंग अलग आजादी है जिसको चाहो आज उसे वर लो होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर लो! निकट हुए तो बनो निकटतर और निकटतम भी जाओ रुढ़ि-रीति के और नीति के शासन से मत घबराओ आज नहीं बरजेगा कोई, मनचाही ... Read More »

जीवन का उत्साह ही होली है

आनंद में डूबना, उसमे सराबोर होना, उसमें समाहित होना मनुष्य की प्रकृति है। आनन्द के लिये ही मानवजीवन के समस्त कर्म है। वो इसका प्यासा है। प्रकृति आनंद से परिपूर्ण है। वह मनमोहक है, उसमे रूप, रंग, गुण, गन्ध, स्वर, रस है। यानी समग्र प्रकृति में सौन्दर्य रचा बसा है। वह नियम से बन्धी है। उसका कर्म लय से जुडा ... Read More »