Wednesday, December 13, 2017
अभी अभी

धनाभाव, गीता प्रेस और आत्मदाह का प्रयास

gitapressगोरखपुर / किसी जमाने में देश के विद्वानजनो के सम्पादकत्व में चलने और हिन्दू संस्कृति को बचाए रखने के उद्देश्य से  प्रख्यात हुई गीता प्रेस आज विवादों में है।  कभी अवैतनिक कार्य , वो भी लम्बे समय तक सम्पादक रहते हुए करने वाले विद्वानो ने गीता प्रेस को पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशो में भी मशहूर बना रखा था।  यह एक ऐसा संस्थान था जहां से हिन्दू संस्कृति को पंख मिलते थे और घर घर पहुँची इसकी प्रकाशित पुस्तकें -पत्रिकाएं ज्ञान का संचार करती थी किन्तु  आज धनाभाव के कारण आये दिन यह विवादों में रहने  लगी है।  कभी प्रेस के बंद हो जाने का विवाद तो कभी वेतन न मिलने तथा बर्खास्तगी के कारण कर्मचारियों द्वारा आत्मदाह का प्रयास।  गीता प्रेस जैसा प्रख्यात संस्थान आज अपनी हालत  पर आंसू बहाता नज़र आ रहा है ।    किन्तु जब इतना प्रख्यात संस्थान है और देश में कई बड़े उद्योगपतियों का यह पसंदीदा प्रकाशन है तो क्यों नहीं कोइ आगे बढ़ता और इसे इसका मुकाम दोबारा हासिल कराता ? यह प्रश्न है।   प्रश्न यह भी है कि क्या गीता प्रेस के संचालक ऐसा चाहते हैं ? 
जो भी हो किन्तु गीता प्रेस से निकल रही ख़बरें इसके चाहने वालों के लिए कोइ सुखद  नहीं है।  ताजा खबर तो यह है कि विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस में प्रबंधन की ओर से बर्खास्त किए गए छह कर्मचारियों ने आत्मदाह करने का प्रयास किया है। इन छह कर्मचारियों ने बीते सोमवार तकरीबन दोपहर के 1 बजे गीताप्रेस के मुख्य गेट पर खड़े होकर अपने ऊपर किरोसिन (मिट्टी का तेल) डाल लिया। इसके बाद खुद को आग लगाने को तैयार हो गए। कर्मचारियों ने जैसे ही खुद पर मिट्टी का तेल डाला उसे देखने के बाद आस-पास खड़े लोगों में हड़कंप मच इतना सब होने पर प्रशासन ने देर न लगाते हुए तुरंत इसकी घटना की सूचना पुलिस को दे दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने फौरन आत्मदाह की कोशिश कर रहे कर्मचारियों को हिरासत में लिया। इस दौरान जमकर हंगामा हुआ।
विवाद वही वेतन न मिलना।  बीते 1 वर्ष से कम वेतन भुगतान को लेकर प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच विवाद चल रहा है। प्रबंधन ने कुछ दिनों पहले 15 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था। जिस पर अपनी बहाली को लेकर बर्खास्त कर्मचारी आंदोलन पर चले गए थे। वेतन बढ़ाने की मांग और पिछले वर्ष दिसम्बर में हुए एक विद्रोह के कारण निकाले गए कर्मचारियों की बहाली जैसे कई मुद्दों पर प्रबंधन और कर्मचारियों के कहासुनी का कारण बनी हुई थी। वहीं प्रबंधन आंदोलनकारी कर्मचारियों की बहाल नहीं कर रहा था, जिसके चलते बर्खास्त कर्मचारियों ने आत्मदाह की कोशिश की। कर्मचारियों ने गीता प्रेस प्रबंधन पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुये कर्मचारियों के शोषण करने की बात कही है।

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