आरटीआई एक्टिविस्ट संजय सिंह ठाकुर ने सरकार को घेरा; कहा- "वर्दी के नाम पर मातृशक्ति का अपमान बर्दाश्त नहीं।"
रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को दी जा रही साड़ियों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ड्रेस कोड के नाम पर निम्न स्तरीय और पारदर्शी साड़ियाँ जबरन थमाए जाने को न केवल प्रशासनिक तानाशाही, बल्कि प्रदेश की महिलाओं का खुला अपमान करार दिया है।
वेतन रोकने की धमकी, तानाशाही का चरम
संजय ठाकुर ने गुरुर (बालोद) के एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी के शासकीय आदेश का हवाला देते हुए खुलासा किया कि अधिकारियों द्वारा कार्यकर्ताओं को लिखित चेतावनी दी जा रही है। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि कार्यकर्ताओं ने इन साड़ियों को स्वीकार नहीं किया, तो उनका वेतन रोक दिया जाएगा। ठाकुर ने कहा, "बेहद कम मानदेय में समाज सेवा करने वाली इन महिलाओं को अपमानजनक वस्त्र पहनने के लिए मजबूर करना उनके आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है।"
प्रमुख माँगें
छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है:
उच्च स्तरीय जाँच
पूरे खरीदी मामले की निष्पक्ष जांच हो ताकि भ्रष्टाचार की परतें खुल सकें।
दोषियों पर कार्रवाई
दोषी अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
गरिमापूर्ण वर्दी
कार्यकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाली और गरिमापूर्ण साड़ियाँ उपलब्ध कराई जाएं।
धमकी भरा आदेश निरस्त हो
वेतन काटने जैसे तुगलकी फरमानों को तुरंत वापस लिया जाए। ठाकुर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार की नजरों में महिलाओं के सम्मान की कोई कीमत नहीं रह गई है, जिसे प्रदेश की जनता देख रही है।
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