नई दिल्ली (खबरगली) राज्यसभा ने ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026′ पारित कर दिया है. इस संशोधन के तहत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान से जुड़े प्रावधानों को कानूनी संरक्षण मिलेगा. इस कानून के लागू होने के बाद अगर कोई जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करता है या राष्ट्रीय गीत में रुकावट डालता है तो उसे 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
बीजेपी सांसद विनोद तावड़े ने एक्स पर पोस्ट में कहा, ”वंदे मातरम् का सम्मान, भारत का अभिमान! जिस मंत्र ने, जिस जय घोष ने देश की आजादी के आंदोलन को ऊर्जा दी, प्रेरणा दी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया, उस राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् का गर्व के साथ पुण्य स्मरण करना हमारा बहुत बड़ा सौभाग्य है.”
उन्होंने कहा, ”आज राज्यसभा में पारित हुआ ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ भारत के सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने का मोदी सरकार के संकल्प का प्रतिबिंब है।”
यह केवल कानून नहीं, भारत की सांस्कृतिक चेतना का सम्मान है”
सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि यह कदम महज एक विधायी बदलाव नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम के आदर्शों और राष्ट्रीय चेतना के प्रति 140 करोड़ भारतीयों के संकल्प को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 में बने मूल कानून में केवल संविधान, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान के अनादर पर सजा का नियम था। लेकिन 2026 का यह संशोधन उस ऐतिहासिक भूल को सुधारते हुए ‘वंदे मातरम’ को भी वही वैधानिक सुरक्षा प्रदान करता है।
क्या है 1971 का मूल कानून
विशेष जानकारी: ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) भारत का वह केंद्रीय कानून है जो राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा), भारत का संविधान, राष्ट्रीय मानचित्र और राष्ट्रगान के अपमान को अपराध मानता है।
2026 के नए संशोधन से अब इस सूची में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का नाम भी आधिकारिक रूप से जुड़ गया है, जिससे इसका अनादर करना अब गैर-जमानती व दंडनीय श्रेणी में आ गया है।
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