महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य सुश्री दीपिका शोरी ने महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों की सुनवाई की
रायपुर (खबरगली ) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का गलत इस्तेमाल अब महिलाओं की छवि खराब करने का नया हथियार बनता जा रहा है। रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सुनवाई के दौरान ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें AI के जरिए आवेदिका की आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार कर सोशल मीडिया पर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किए जाने की शिकायत की गई। मामले को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति की तस्वीर को AI के माध्यम से आपत्तिजनक रूप में तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आ सकता है और ऐसी हरकतों पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
AI से तस्वीर बनाकर सोशल मीडिया पर बदनाम करने का मामला पहुंचा महिला आयोग
रायपुर स्थित महिला आयोग कार्यालय में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान यह मामला सामने आया। शिकायत के मुताबिक, AI की मदद से आवेदिका की आपत्तिजनक तस्वीरें तैयार कर सोशल मीडिया के माध्यम से उसकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।
महिला आयोग ने मामले को बताया गंभीर साइबर अपराध
आयोग ने इस तरह की गतिविधि को गंभीरता से लेते हुए कहा कि तकनीक का इस्तेमाल किसी महिला को बदनाम, परेशान या मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए नहीं किया जा सकता। आयोग के अनुसार पीड़िता संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र है और मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
महिला आयोग में 30 मामलों में हुई सुनवाई, 5 प्रकरण नस्तीबद्ध
महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और सदस्य सुश्री दीपिका शोरी ने रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों की सुनवाई की। इस दौरान कुल 30 प्रकरणों में से 17 प्रकरणों की सुनवाई की गई, जबकि 5 प्रकरण नस्तीबद्ध किए गए।
घरेलू हिंसा से लेकर संपत्ति विवाद तक के मामले
सुनवाई में केवल AI से जुड़ा मामला ही नहीं, बल्कि महिलाओं से संबंधित कई अन्य शिकायतें भी सामने आईं। इनमें प्रमुख रूप से— घरेलू हिंसा धमकी और प्रताड़ना संपत्ति से बेदखली वैवाहिक विवाद पारिवारिक प्रताड़ना जैसे मामले शामिल रहे। आयोग ने संबंधित पक्षों को आवश्यक समझाइश देने के साथ विधिक परामर्श और उचित कार्रवाई के लिए निर्देश दिए।
Deepfake और AI तस्वीरों का बढ़ता खतरा, महिलाओं की सुरक्षा बनी चुनौती
AI तकनीक ने फोटो और वीडियो तैयार करना आसान बनाया है, लेकिन इसके दुरुपयोग ने डीपफेक और फर्जी आपत्तिजनक तस्वीरों जैसी नई साइबर चुनौतियां भी खड़ी की हैं। किसी महिला की वास्तविक तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर उसे आपत्तिजनक स्वरूप देना और फिर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
फर्जी AI तस्वीर दिखे तो पीड़िता क्या करे?
ऐसे मामलों में पीड़िता को घबराने के बजाय उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए। संबंधित पोस्ट, प्रोफाइल, चैट, URL और स्क्रीनशॉट को सुरक्षित रखना कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके बाद पुलिस या संबंधित साइबर अपराध तंत्र के माध्यम से शिकायत की जा सकती है।
महिला आयोग का संदेश- AI का इस्तेमाल जिम्मेदारी से करें
महिला आयोग की सुनवाई से एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है कि AI तकनीक का दुरुपयोग किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए करना गंभीर मामला हो सकता है। सोशल मीडिया पर किसी महिला की तस्वीर या वीडियो को एडिट कर आपत्तिजनक रूप देना, उसे फर्जी तरीके से प्रसारित करना या बदनाम करने का प्रयास करना केवल ऑनलाइन मजाक नहीं माना जा सकता। परिस्थितियों के अनुसार ऐसे कृत्यों पर कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है।
महिला आयोग की सुनवाई में सामने आए महत्वपूर्ण आंकड़े
30 — कुल प्रकरण,17 — प्रकरणों की सुनवाई, 5 — प्रकरण नस्तीबद्ध, 1 महत्वपूर्ण मामला — AI से आपत्तिजनक तस्वीर बनाकर सोशल मीडिया पर छवि खराब करने की शिकायत
AI के दुरुपयोग पर महिला आयोग की सख्त चेतावनी
रायपुर में हुई इस सुनवाई ने यह सवाल भी सामने ला दिया है कि AI के दौर में महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उसके दुरुपयोग के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। महिला आयोग का रुख साफ है—किसी महिला की छवि खराब करने के लिए AI का इस्तेमाल करना स्वीकार्य नहीं है और पीड़िता को कानूनी कार्रवाई का अधिकार है।
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