छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से बारिश का अलर्ट, मौसम विभाग ने जताई संभावना

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रायपुर (खबरगली) प्रदेश में इस साल मानसून की शुरुआत बेहद कमजोर रही है। मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के बावजूद प्रदेश में व्यापक वर्षा नहीं हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) नहीं बनने के कारण भारी बारिश का सिस्टम सक्रिय नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में जो भी छिटपुट बारिश हो रही है, वह केवल द्रोणिका (ट्रफ लाइन) और अन्य स्थानीय प्रणालियों के कारण है। हालांकि, मौसम विभाग ने एक बार फिर 1 जुलाई से प्रदेश में व्यापक वर्षा और अगले एक सप्ताह तक कहीं-कहीं भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।  जून महीना बीतने में अब सिर्फ एक दिन शेष है, लेकिन प्रदेश में बारिश के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।

22 जून को पंहुचा था मानसून 

जून में अब तक केवल 60.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 182.2 मिमी बारिश हो जानी चाहिए थी। यह सामान्य से 67 फीसदी कम है। स्थिति इतनी गंभीर है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में बारिश का ग्राफ कम या बेहद कम की श्रेणी में है। आमतौर पर जून महीने के 12 दिनों में भारी से अतिभारी बारिश होती है (9 दिन भारी, 2 दिन बहुत भारी और 1 दिन अतिभारी), लेकिन इस बार यह आंकड़ा शून्य रहा। प्रदेश में मानसून ने 22 जून को दंतेवाड़ा के रास्ते दस्तक दी थी और 23 जून को यह रायपुर पहुंचा। इसके बावजूद एक सप्ताह बीतने के बाद भी मानसून पूरे प्रदेश में नहीं फैल सका है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में मानसून राज्य के बाकी हिस्सों को भी कवर कर लेगा।

बुआई पिछड़ने से किसानों की बढ़ी चिंता

आषाढ़ महीने के प्रवेश के साथ ही किसानों की चिंताएं गहरी हो गई हैं। पानी नहीं गिरने के कारण राज्य में अब तक लक्ष्य के मुकाबले केवल 3 से 4 फीसदी ही बुआई हो सकी है। इस साल सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर में खरीफ फसलों की बोनी का लक्ष्य रखा है। कम बारिश के संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने सूखे से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कृषि विभाग ने किसानों को कम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

इसके साथ ही धान के बदले मक्का, कोदो, कुटकी, रागी जैसी कम पानी वाली फसलों और दलहन-तिलहन को अंतरवर्तीय (इंटरक्रॉपिंग) फसल के रूप में लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार ने राज्य बीज निगम को 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज सुरक्षित रखने और बीमा कंपनियों के साथ समन्वय बनाकर फसल नुकसान की भरपाई का प्रभावी प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

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