दुर्ग (खबरगली ) महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय, संवेदनशील सुनवाई और आवश्यक कानूनी सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने महत्वपूर्ण पहल की है। गुरुवार को दुर्ग कलेक्टरेट में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू के नेतृत्व में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों की जनसुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान घरेलू विवाद, महिला उत्पीड़न सहित विभिन्न मामलों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना गया। दुर्ग में आयोजित इस जनसुनवाई में कुल 27 प्रकरणों पर सुनवाई हुई। कई मामलों में आवश्यक मार्गदर्शन और समझाइश दी गई, जबकि गंभीर प्रकृति के मामलों में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कुछ मामलों में एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित महिलाओं को विधिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
जनसुनवाई से पहले कलेक्टर और एसपी से मुलाकात
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से समन्वय पर जोर
जनसुनवाई से पहले महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने दुर्ग कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से सौजन्य भेंट की। इस मुलाकात को महिलाओं से संबंधित मामलों में प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों को सुनना ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों के माध्यम से महिलाओं को न्याय और सुरक्षा दिलाना भी है। इसी दृष्टिकोण के साथ जनसुनवाई में मामलों की सुनवाई की गई।
27 प्रकरणों पर हुई सुनवाई गंभीर मामलों में अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान आयोग के सामने महिला उत्पीड़न से जुड़े अलग-अलग प्रकार के मामले सामने आए। आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रकरण की परिस्थितियों के आधार पर आवश्यक मार्गदर्शन दिया। जहां मामलों में आपसी समझाइश से समाधान की संभावना दिखाई दी, वहां पक्षकारों को पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को बेहतर बनाने की सलाह दी गई। वहीं गंभीर मामलों में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
जरूरतमंद महिलाओं को मिलेगी विधिक सहायता
जनसुनवाई के दौरान उन महिलाओं को भी मार्गदर्शन दिया गया जिन्हें अपने अधिकारों की जानकारी या कानूनी प्रक्रिया को लेकर सहायता की आवश्यकता थी। आयोग की ओर से जरूरत के अनुसार विधिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। महिला आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को अपने अधिकारों के लिए अकेले कानूनी प्रक्रिया से जूझना न पड़े, इसके लिए संबंधित संस्थाओं और अधिकारियों के माध्यम से आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
FIR से लेकर समझाइश तक, मामले के अनुसार हुई कार्रवाई
संवेदनशील मामलों में आयोग का सख्त रुख जनसुनवाई में कुछ प्रकरण ऐसे भी रहे, जहां आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। आवश्यक मामलों में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए, जबकि अन्य मामलों में समझाइश और मार्गदर्शन के माध्यम से समाधान की कोशिश की गई। आयोग का यह रुख बताता है कि महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों में हर शिकायत को उसकी प्रकृति और परिस्थितियों के आधार पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य पीड़ित महिला को न्याय दिलाने के साथ-साथ उसे सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
कई मामलों में निराकरण, बाकी की अगली सुनवाई तय
लंबित प्रकरणों पर आगे भी होगी सुनवाई
दुर्ग की जनसुनवाई में कुल 27 मामलों को सुना गया। इनमें से कई प्रकरणों में आवश्यक कार्रवाई और मार्गदर्शन के बाद निराकरण की दिशा में कदम उठाए गए, जबकि जिन मामलों में आगे जांच, कार्रवाई या अतिरिक्त सुनवाई की आवश्यकता है, उन्हें आगामी तारीख के लिए नियत किया गया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू के साथ सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी, सुश्री दीपिका शोरी और श्रीमती सरला कोसरिया भी जनसुनवाई में उपस्थित रहीं।
महिलाओं को न्याय दिलाने पर महिला आयोग का फोकस
दुर्ग में हुई यह जनसुनवाई महिलाओं की शिकायतों को सीधे सुनने और उन्हें उचित मंच उपलब्ध कराने की पहल के रूप में सामने आई। संवेदनशील सुनवाई, विधिक सहायता, प्रशासनिक समन्वय और जरूरत पड़ने पर पुलिस कार्रवाई—इन सभी माध्यमों से आयोग ने महिला हितों से जुड़े मामलों के निराकरण की दिशा में काम किया।
- Log in to post comments