सुरों की मल्लिका आशा भोंसले और रायपुर का 'सुनहरा नाता': चीला-फरा का स्वाद और स्टेडियम की वो यादगार शाम

The 'golden bond' between the queen of melody, Asha Bhosle, and Raipur: The taste of cheela-fara and that memorable evening at the stadium; Asha Tai's voice echoed through Raipur's indoor stadium; the Nightingale of India became a fan of Chhattisgarhi culture; Chhattisgarh, Khabargali

रायपुर के कोटा और इंडोर स्टेडियम में गूँजी थी आशा ताई की आवाज़, छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मुरीद हुईं स्वर कोकिला

रायपुर (खबरगली ) सुरों की जादूगरनी आशा भोंसले का छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से बेहद गहरा और आत्मीय रिश्ता रहा है। यहाँ आयोजित उनके लाइव कॉन्सर्ट आज भी शहरवासियों के जेहन में ताज़ा हैं। विशेष रूप से बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में हुआ उनका कार्यक्रम मील का पत्थर माना जाता है, जहाँ उन्हें सुनने के लिए न केवल रायपुर बल्कि पूरे प्रदेश से जनसैलाब उमड़ पड़ा था। इससे पहले 1983 में कोटा स्टेडियम में भी उनका कार्यक्रम हुआ था।

वो सदाबहार गीत और दर्शकों की फरमाइश

स्टेडियम की उस शाम दर्शकों की फरमाइश पर जब आशा जी ने 'दम मारो दम', 'पिया तू अब तो आजा', 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' और 'दिल चीज़ क्या है' जैसे कालजयी गीत गाए, तो पूरा परिसर तालियों की गूँज से सराबोर हो गया।

छत्तीसगढ़ी स्वाद और सादगी की प्रशंसक

आशा जी केवल संगीत ही नहीं, बल्कि यहाँ की संस्कृति और खान-पान की भी मुरीद रही हैं। अपने प्रवास के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों— 'चीला' और 'फरा' का आनंद लिया और यहाँ के लोगों के सरल स्वभाव की जमकर सराहना की।

आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव

अपनी यात्राओं के दौरान उन्होंने रायपुर के प्रमुख मंदिरों और आश्रमों में भी समय बिताया, जो उनके आध्यात्मिक पक्ष को दर्शाता है। स्थानीय संगीत प्रेमियों के साथ बातचीत में उन्होंने हमेशा छत्तीसगढ़ी लोक कला के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया है। उनकी ये यादें आज भी रायपुर की सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल हिस्सा हैं।

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