रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ के चर्चित कोयला लेवी मामले में भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) ने 5 अक्टूबर 2026 को रायपुर की विशेष अदालत में उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, EOW-ACB जांच पूरी होने के बाद अभियोग पत्र पेश करने की तैयारी में है। नोटिस में यादव को 5 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे विशेष न्यायालय में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
28 सितंबर को हुई थी पूछताछ
इससे पहले EOW ने 28 सितंबर को देवेंद्र यादव को पूछताछ के लिए रायपुर स्थित कार्यालय बुलाया था। रिपोर्टों के मुताबिक उनसे दो घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी। इसके बाद 30 सितंबर को जारी नोटिस के जरिए उन्हें अभियोग पत्र पेश किए जाने के दौरान विशेष अदालत में उपस्थित रहने को कहा गया। नोटिस में अपराध क्रमांक 03/2024 का उल्लेख है। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7, 7ए और 12 तथा भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420, 120-बी, 384, 467, 468 और 471 के तहत दर्ज मामले का संदर्भ दिया गया है।
सूर्यकांत तिवारी से जुड़े दस्तावेज जांच के दायरे में
कोयला लेवी मामले की जांच के दौरान कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से जुड़े दस्तावेजों और डायरी में देवेंद्र यादव के नाम का उल्लेख मिलने की बात रिपोर्टों में सामने आई है। इसी संदर्भ में EOW ने यादव से पूछताछ की थी। हालांकि, किसी दस्तावेज या डायरी में नाम का उल्लेख अथवा जांच एजेंसी का नोटिस आरोपों के न्यायिक रूप से सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में अंतिम स्थिति अदालत की प्रक्रिया से तय होगी।
540 करोड़ की कथित अवैध वसूली का मामला
कोयला लेवी प्रकरण में जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन अवैध राशि वसूली गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच करीब 540 करोड़ रुपए की कथित वसूली की जांच की गई है। मामले में प्रवर्तन निदेशालय और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जांच अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत चलती रही है। EOW-ACB अब अपनी विवेचना के बाद विशेष अदालत में अभियोग पत्र पेश करने की प्रक्रिया में है।
विधायक ने आरोपों को खारिज किया
देवेंद्र यादव ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसी के आरोप और उपलब्ध दस्तावेज अदालत में परीक्षण के अधीन होते हैं। नोटिस जारी होना या जांच में नाम सामने आना अपने आप में दोष सिद्ध नहीं करता। 5 अक्टूबर को विशेष अदालत में होने वाली कार्यवाही के बाद मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
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