नई दिल्ली (खबरगली ) सोचिए, आपके मोबाइल पर आया एक छोटा-सा मैसेज आपको कुछ ही मिनटों में ऐसे साइबर जाल में फंसा सकता है, जहां आपकी मेहनत की कमाई ही नहीं, बल्कि पूरा बैंक अकाउंट भी खतरे में पड़ सकता है। भारत में साइबर धोखाधड़ी का बदलता चेहरा अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और हाईटेक होता जा रहा है। AI आधारित स्कैम, मोबाइल चैनलों और ‘मनी म्यूल’ अकाउंट के बढ़ते नेटवर्क ने साइबर अपराधियों के लिए धोखाधड़ी को आसान बना दिया है।
हालिया रिपोर्ट से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि भारत में डिजिटल फ्रॉड की रफ्तार और उसकी आर्थिक कीमत दोनों तेजी से बढ़ रही हैं। टेक्स्ट मैसेज आधारित स्कैम में 146 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि मोबाइल धोखाधड़ी के मामलों में 67 फीसदी का उछाल आया है।
साइबर फ्रॉड का नया हथियार बना मोबाइल और AI
साइबर अपराधी अब सिर्फ फर्जी कॉल या ईमेल तक सीमित नहीं हैं। AI और मोबाइल तकनीक के इस्तेमाल ने धोखाधड़ी के तरीके को और ज्यादा तेज और भरोसेमंद दिखने वाला बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल फ्रॉड में iOS यूजर्स से जुड़े मामलों में 86 फीसदी, जबकि Android पर 35 फीसदी की वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब है कि स्मार्टफोन अब सिर्फ सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि साइबर अपराधियों के लिए संभावित निशाना भी बनता जा रहा है।
146% बढ़े टेक्स्ट मैसेज स्कैम
टेक्स्ट मैसेज आधारित धोखाधड़ी में 146 फीसदी की वृद्धि सबसे बड़ा संकेत है। फर्जी बैंक अलर्ट, पेमेंट लिंक, KYC अपडेट, डिलीवरी नोटिफिकेशन या अन्य जरूरी संदेशों के नाम पर लोगों को लिंक पर क्लिक करने के लिए उकसाया जाता है। एक बार यूजर जाल में फंसता है तो उसकी बैंकिंग जानकारी या पैसे तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है।
कम समय में ज्यादा रकम उड़ाने का खेल
साइबर फ्रॉड का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार जोखिम वाले पेमेंट सेशन दोगुने यानी 2 गुना हो गए हैं। वहीं, धोखाधड़ी वाले सेशन की औसत अवधि 32 फीसदी कम हुई है। लेकिन सबसे ज्यादा चिंता वाली बात यह है कि कम समय में होने वाली धोखाधड़ी में ट्रांसफर की औसत रकम 1.7 गुना बढ़ गई है।
32% कम समय, लेकिन 1.7 गुना ज्यादा रकम
यानी साइबर अपराधी अब कम समय में ज्यादा रकम ट्रांसफर कराने की कोशिश कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि फ्रॉड के तरीके अधिक संगठित, तेज और तकनीकी रूप से सक्षम होते जा रहे हैं।
8.5 लाख मनी म्यूल अकाउंट ने बढ़ाई चिंता
साइबर फ्रॉड की दुनिया में ‘मनी म्यूल’ एक ऐसा अकाउंट होता है जिसका इस्तेमाल अवैध या संदिग्ध धन को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। कई मामलों में ऐसे अकाउंट जानबूझकर उपलब्ध कराए जाते हैं, जबकि कुछ लोग लालच या धोखे में अपने बैंक अकाउंट का इस्तेमाल होने देते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में जांचकर्ताओं ने कई भारतीय बैंकों की 700 से ज्यादा शाखाओं में 8.5 लाख से अधिक मनी म्यूल अकाउंट का पता लगाया। यह आंकड़ा बताता है कि भारत में म्यूल अकाउंट का नेटवर्क कितना बड़ा हो सकता है।
साइबर फ्रॉड की शिकायतें पहुंचीं ₹22,496 करोड़
2025 में भारत में साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों की रकम ₹22,496 करोड़ तक पहुंच गई। इसी दौरान मनी म्यूल अकाउंट से जुड़े करीब 26.48 लाख मामले सामने आए। हालांकि राहत की बात यह है कि संदिग्ध रजिस्ट्री के जरिए ₹9,055 करोड़ के ट्रांजैक्शन को रोके जाने की जानकारी भी सामने आई है।
क्या AI स्कैम को और खतरनाक बना रहा है?
AI की मदद से तैयार किए गए फर्जी संदेश, आवाज, पहचान और बेहद विश्वसनीय दिखने वाले डिजिटल कंटेंट साइबर अपराधियों को लोगों का भरोसा जीतने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि अब सिर्फ अनजान लिंक से बचना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
मोबाइल यूजर्स को क्यों रहना होगा अलर्ट?
बैंकिंग से जुड़े किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, OTP या PIN साझा करने, अनजान ऐप इंस्टॉल करने या किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक अकाउंट इस्तेमाल करने देने से बचना जरूरी है।
भारत में साइबर फ्रॉड अब सिर्फ तकनीक की समस्या नहीं रह गया है। यह तेजी से बढ़ता आर्थिक और सामाजिक खतरा बन रहा है। AI स्कैम और मनी म्यूल नेटवर्क के विस्तार ने आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा की चुनौती को और गंभीर बना दिया है।
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