बिलासपुर (खबरगली) पत्नी द्वारा पति को उसके सांवले रंग और मोटे शरीर को लेकर ताने देने का आरोप तलाक का आधार नहीं बन सकता। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में यह टिप्पणी करते हुए पति की तलाक की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि केवल आरोप लगाने से क्रूरता साबित नहीं होती, इसके लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं। जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने चांपा निवासी आकाश घोष की अपील पर यह फैसला सुनाया। पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक की अर्जी खारिज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
आकाश घोष और पूजा का विवाह 7 मार्च 2019 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। शादी के बाद पत्नी करीब दो-तीन महीने पति और उसके परिवार के साथ रही। इसके बाद वह रिश्तेदार की शादी में शामिल होने राजस्थान गई और करीब 25 दिन बाद लौटी। इस दौरान पत्नी का जुड़वां बच्चों का गर्भपात हो गया। उसकी मां उसे इलाज के लिए रायगढ़ ले गई। पति का दावा था कि उसने पत्नी को वापस लाने के कई प्रयास किए, लेकिन वह साथ आने के लिए तैयार नहीं हुई। उसने 5 नवंबर 2019 को जांजगीर काउंसिलिंग सेंटर में भी संपर्क किया। इसके बाद 16 दिसंबर 2019 को वह समाज के लोगों के साथ पत्नी को लेने रायगढ़ गया, लेकिन पत्नी ने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया।
आरोप कई लेकिन सबूत नहीं
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद कहा कि युवक अपनी पत्नी की ओर से की गई क्रूरता और परित्याग को साबित नहीं कर सका। पति ने पत्नी पर उसे काला और मोटा कहकर ताने देने का आरोप भी लगाया था। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की परिस्थितियों में ऐसी बातें तलाक देने के लिए पर्याप्त क्रूरता नहीं मानी जा सकतीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्नी के खिलाफ लगाए गए अन्य आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और निर्णायक साक्ष्य पेश नहीं किया गया। इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा तलाक से इनकार करने के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
- Log in to post comments
