मैनपुर (खबरगली) आजादी के 79वें वर्ष में भी गरियाबंद जिले का राजापड़ाव क्षेत्र अंधकार के साये में जीने को मजबूर है। क्षेत्र के 48 गांवों में बिजली की सुविधा न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने अपनी व्यथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने के लिए भावनात्मक रास्ता चुना है। बुधवार को ग्राम अड़गड़ी में आयोजित महाबैठक में 500 से अधिक ग्रामीणों ने अपने खून से पीएम और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को मार्मिक पत्र लिखे। जय अंबेडकरवादी युवा संगठन और किसान संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्रित हुए ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से बिजली सुविधा की गुहार लगा रहे हैं। कोकरी, गरहाडीह, गौरगांव, भूतबेड़ा सहित आठ पंचायतों के सैकड़ों परिवार आज भी लालटेन युग में जी रहे हैं।
बिजली के अभाव में न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर भी नदारद हैं। इस महाबैठक में ग्रामीणों ने संविधान की 5वीं अनुसूची और 'पेसा अधिनियम 1996' के तहत ग्राम सभा के अधिकारों को रेखांकित करते हुए एक शिलालेख का भूमिपूजन भी किया। इसमें स्पष्ट किया गया है कि जल-जंगल-जमीन पर ग्राम सभा का अधिकार सर्वोच्च है। कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी भी रही, जहां बुजुर्ग महिलाओं ने सबसे पहले अपना खून निकालकर पत्र लिखे। ग्रामीणों ने प्रशासन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समाधान नहीं निकला, तो वे हजारों की संख्या में राजधानी कूच करेंगे और मुख्यमंत्री निवास के सामने अपनी मांग रखेंगे।
अधिकारी बना रहे बहाने, ग्रामीणों का धैर्य टूटा
जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम के अनुसार, पिछले एक दशक से लगातार मांग के बावजूद स्थानीय प्रशासन और बिजली विभाग हर बार 'उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व' और एनटीसीए की एनओसी का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेता है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनवरी 2026 में प्रशासन ने छह माह में विद्युतीकरण का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष दैनिक मंडावी ने कहा, जब हर दरवाजा बंद हो गया, तो हमने अपनी पीड़ा खून से लिखने का निर्णय लिया।
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