बाल आयोग की बड़ी बैठक में फैसला, हर मुक्त बच्चे को मिलेगा नया जीवन; बाल श्रम कराने वालों पर होगी बहुस्तरीय कानूनी कार्रवाई
रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ में बाल श्रम (Child Labour in Chhattisgarh) के खिलाफ अब और सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब बाल श्रमिकों के रेस्क्यू के बाद केवल उन्हें छुड़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना, कड़ी कानूनी कार्रवाई करना और हर मुक्त बच्चे का समग्र पुनर्वास सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। राजधानी रायपुर में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में श्रम विभाग के अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बाल श्रम उन्मूलन को लेकर कई अहम फैसले लिए।
रेस्क्यू के बाद हर बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने पेश करना होगा
बैठक में निर्णय लिया गया कि किसी भी बाल श्रमिक को रेस्क्यू करने के बाद उसे अनिवार्य रूप से बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत उसके संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आर्थिक सहायता में देरी पर जताई नाराजगी
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों को मिलने वाली सरकारी आर्थिक सहायता और क्षतिपूर्ति राशि समय पर नहीं मिल रही है। इस पर आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आर्थिक सहायता में देरी बच्चों के पुनर्वास को प्रभावित करती है। उन्होंने निर्देश दिए कि पात्र प्रत्येक बाल श्रमिक को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।
बाल श्रम कराने वालों पर अब कई कानूनों के तहत होगी कार्रवाई
बैठक में यह भी तय किया गया कि अब कार्रवाई केवल बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तक सीमित नहीं रहेगी। मामले की गंभीरता के अनुसार दोषियों पर इन कानूनों के तहत भी एफआईआर दर्ज की जाएगी— भारतीय न्याय संहिता (BNS) किशोर न्याय अधिनियम, 2015 बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 अन्य लागू कानूनी प्रावधान। आयोग ने स्पष्ट किया कि दोषी नियोजकों के खिलाफ कठोर अभियोजन सुनिश्चित किया जाएगा।
जिले-जिले में टास्क फोर्स और सतर्कता समितियां करेंगी संयुक्त कार्रवाई
बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रत्येक जिले में गठित बाल श्रम टास्क फोर्स और बंधुआ मजदूर सतर्कता समिति के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि बाल श्रम के मामलों में त्वरित कार्रवाई हो सके। साथ ही गृह, स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास तथा कौशल विकास विभागों की भूमिका को भी और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
बाल श्रमिकों को शिक्षा और सम्मानजनक जीवन से जोड़ने पर फोकस
आयोग ने कहा कि बाल श्रमिकों का पुनर्वास केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। मुक्त कराए गए बच्चों को— स्कूलों में दाखिला, कौशल विकास प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य से जोड़ने के लिए सभी विभाग मिलकर काम करेंगे।
श्रम अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
बैठक में यह भी तय हुआ कि सभी जिलों के श्रम अधिकारियों और श्रम निरीक्षकों को बाल श्रम मामलों में रेस्क्यू, कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास संबंधी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी नियमित समीक्षा रिपोर्ट भी आयोग को भेजी जाएगी।
डॉ. वर्णिका शर्मा का बड़ा संदेश
बैठक के अंत में आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बाल श्रम के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रहा है। किसी भी बच्चे का बचपन श्रम की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। बाल श्रम कराने वाले प्रत्येक दोषी के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होगी और हर मुक्त बच्चे को सुरक्षित, शिक्षित एवं सम्मानजनक भविष्य दिलाना आयोग की प्राथमिकता है।
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