बिलासपुर और मुंगेली में GST टीम की बड़ी कार्रवाई, 6 कारोबारियों के ठिकानों पर दबिश, 115 से ज्यादा बोगस डीलर जांच के घेरे में

Major crackdown by the GST team in Bilaspur and Mungeli raids conducted on the premises of six businessmen, with over 115 bogus dealers under scrutiny. Latest news hindi news big News khabargali

रायपुर (खबरगली) जीएसटी स्टेट टीम ने टैक्स से जुड़ी कथित अनियमितताओं और संभावित जीएसटी चोरी के मामलों को लेकर बिलासपुर और मुंगेली जिले में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की अलग-अलग टीमों ने दोनों जिलों में कुल छह कारोबारियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर एक साथ दबिश देकर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू की। मुंगेली जिला मुख्यालय में तीन होटल-रेस्टोरेंट और बिलासपुर के व्यापार विहार स्थित थोक बाजार में तीन व्यापारिक प्रतिष्ठान जांच के दायरे में हैं।

कार्रवाई के दौरान जीएसटी अधिकारियों ने कारोबारियों के स्टॉक, खरीद-बिक्री के बिल, इनवॉइस, जीएसटी रिटर्न, ई-वे बिल, कंप्यूटर में मौजूद डेटा और लेनदेन से संबंधित दस्तावेजों को खंगाला। विभाग की जांच का मुख्य फोकस कारोबार के वास्तविक टर्नओवर और जीएसटी रिटर्न में घोषित कारोबार के बीच किसी तरह के अंतर का पता लगाना है। अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों का मिलान कर यह देखा जा रहा है कि कारोबारियों ने टैक्स देनदारी के अनुरूप सही जानकारी विभाग को दी है या नहीं।

व्यापार विहार में गुटखा, ड्रायफ्रूट्स और तेल कारोबार की जांच

बिलासपुर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र व्यापार विहार में जीएसटी स्टेट टीम ने गुटखा, ड्रायफ्रूट्स और तेल कारोबार से जुड़े तीन प्रतिष्ठानों में जांच की। कार्रवाई के दौरान टीम ने प्रतिष्ठानों में मौजूद स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के साथ ही स्टॉक रजिस्टर और अन्य व्यापारिक रिकॉर्ड से उसका मिलान किया।

अधिकारियों ने खरीद और बिक्री से जुड़े बिलों के साथ-साथ जीएसटी रिटर्न में दर्ज आंकड़ों की भी पड़ताल की। कंप्यूटर और डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध पुराने लेनदेन का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिया गया है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कहीं वास्तविक बिक्री को कम दिखाकर टैक्स देनदारी कम तो नहीं की गई या फिर ऐसे कारोबार को कागजों पर दिखाया गया है, जिसकी वास्तविकता अलग है।

मुंगेली के तीन होटल-रेस्टोरेंट भी जांच के घेरे में

इधर मुंगेली जिला मुख्यालय में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े तीन प्रतिष्ठानों पर जीएसटी टीम ने कार्रवाई की। विभाग को कथित तौर पर कुछ प्रतिष्ठानों में कच्चे बिल के जरिए बिक्री दर्ज करने और टैक्स बचाने से संबंधित शिकायतें मिली थीं। इसके बाद संबंधित कारोबारियों के बिक्री रिकॉर्ड, बिलिंग सिस्टम और टैक्स से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई।

जांच के दौरान होटल कारोबार में होने वाली वास्तविक बिक्री और जीएसटी रिकॉर्ड में दर्ज बिक्री के आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा बिलिंग सॉफ्टवेयर और डिजिटल डेटा की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि किसी तरह की अनियमितता या बिक्री छिपाने की स्थिति सामने आ सके।

बावा होटल पर 60 लाख रुपये जुर्माने की जानकारी

कार्रवाई से जुड़ी जानकारी के अनुसार मुंगेली के गेली स्थित बावा होटल पर करीब 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि जीएसटी चोरी से संबंधित देनदारी और जुर्माने की पूरी रकम वसूल कर सरकारी खजाने में जमा करा दी गई है।

हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक दस्तावेज या अंतिम कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कुल टैक्स देनदारी, ब्याज और जुर्माने की वास्तविक राशि कितनी है और किस आधार पर कार्रवाई की गई।

हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर भी विभाग की नजर

जीएसटी विभाग की जांच सिर्फ इन छह प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं बताई जा रही है। विभाग की नजर हैवी ट्रांसपोर्ट कंपनियों और उनसे जुड़ी संदिग्ध कारोबारी गतिविधियों पर भी है। खासतौर पर बिना वैध ई-वे बिल माल परिवहन करने और कथित फर्जी इनवॉइस के जरिए लेनदेन दिखाने वाले नेटवर्क की जांच की जा रही है।

जीएसटी अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बिल में दर्ज माल वास्तव में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचा था या सिर्फ कागजों पर ही लेनदेन दिखाया गया। ई-वे बिल, वाहन संबंधी जानकारी, इनवॉइस और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड का आपस में मिलान कर संदिग्ध लेनदेन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

तीन वित्तीय वर्षों के रिकॉर्ड में 115 से ज्यादा संदिग्ध डीलर चिन्हित

विभागीय जांच से जुड़ी जानकारी के मुताबिक पिछले तीन वित्तीय वर्षों के जीएसटी रिटर्न और कारोबारी लेनदेन की पड़ताल के दौरान 115 से अधिक संदिग्ध बोगस डीलरों और कथित शेल कंपनियों को चिन्हित किया गया है। आरोप है कि कुछ फर्मों के जरिए वास्तविक कारोबार किए बिना केवल कागजों पर खरीद-बिक्री दर्शाई गई और इसके माध्यम से करोड़ों रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) ट्रांसफर किया गया।

यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं तो ऐसे मामलों में संबंधित फर्मों के साथ उन कारोबारियों की भूमिका भी जांची जा सकती है, जिन्होंने कथित तौर पर ऐसे इनवॉइस का इस्तेमाल कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया। विभाग द्वारा लेनदेन की पूरी चेन को खंगालने का प्रयास किया जा रहा है।

कंप्यूटर और डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे

जीएसटी टीम की कार्रवाई में अब सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि डिजिटल रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। अधिकारियों द्वारा कंप्यूटर, बिलिंग सॉफ्टवेयर, डिजिटल अकाउंटिंग रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री की जांच की जा रही है। खरीद-बिक्री के बिलों को जीएसटी पोर्टल पर दाखिल रिटर्न और ई-वे बिल से मिलाया जा रहा है।

जांच के दौरान यदि स्टॉक और रिकॉर्ड में अंतर मिलता है या बिक्री की वास्तविक मात्रा और घोषित कारोबार में बड़ा अंतर सामने आता है, तो विभाग संबंधित कारोबारी से टैक्स, ब्याज और नियमानुसार जुर्माने की वसूली की कार्रवाई कर सकता है।

दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक देनदारी

फिलहाल बिलासपुर और मुंगेली में छह प्रतिष्ठानों पर जीएसटी विभाग की जांच जारी होने की जानकारी है। टीम द्वारा दस्तावेजों, स्टॉक और डिजिटल रिकॉर्ड का विस्तृत मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन कारोबारियों के खिलाफ कितनी टैक्स देनदारी बनती है और किन मामलों में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है।

 

जीएसटी विभाग की इस कार्रवाई को टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट के खिलाफ चल रही कार्रवाई से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी प्रतिष्ठानों या कारोबारियों पर कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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