छत्तीसगढ़ के धान को मिलेगी नई पहचान, भाटापारा बनेगा फूड प्रोसेसिंग हब, किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदा

Chhattisgarh's paddy to gain a new identity; Bhatapara to become a food processing hub, benefiting farmers and the youth Chhattisgarh News Hindi News latest news khabargali

रायपुर(खबरगली) छत्तीसगढ़ के धान को सिर्फ चावल तक सीमित रखने के बजाय उससे जुड़े वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में पहल शुरू की गई है। इसी सिलसिले में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान से मुलाकात कर भाटापारा के पोहा उद्योग को आधुनिक चावल-आधारित खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

 

इस पहल का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में उत्पादित धान से अधिक से अधिक वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार करना है, ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हों।

 

पोहा से लेकर Ready-to-Eat उत्पादों तक पर फोकस

प्रस्ताव के तहत भाटापारा में पोहा, मुरमुरा, राइस-बेस्ड स्नैक्स और विभिन्न तरह के Ready-to-Eat Products की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की योजना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और प्रभावी ब्रांडिंग पर जोर दिया जाएगा।

 

इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को देश के अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी उतारने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

 

केंद्रीय मंत्री ने मांगी विस्तृत परियोजना मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए विस्तृत परियोजना तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा है। परियोजना के जरिए भाटापारा में उपलब्ध पोहा उद्योग की संभावनाओं को आधुनिक फूड प्रोसेसिंग सुविधाओं से जोड़ने का खाका तैयार किया जाएगा।

 

किसानों और युवाओं को मिलेगा फायदा

फूड प्रोसेसिंग हब विकसित होने से इसका सीधा फायदा कृषि क्षेत्र से जुड़े किसानों को मिलने की उम्मीद है। धान की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और उससे अलग-अलग वैल्यू एडेड उत्पाद तैयार होने से किसानों की उपज के लिए नए बाजार विकसित हो सकते हैं।

 

वहीं, प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग और अन्य संबंधित गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

 

छत्तीसगढ़ में ही हो धान का अधिकतम वैल्यू एडिशन

इस पहल के पीछे मुख्य जोर इस बात पर है कि छत्तीसगढ़ के धान की अधिकतम Value Addition राज्य के भीतर ही हो। इससे कच्चे कृषि उत्पाद को दूसरे राज्यों में भेजने के बजाय स्थानीय स्तर पर उसका प्रसंस्करण कर अधिक मूल्य का उत्पाद तैयार किया जा सकेगा।

भाटापारा को राइस-बेस्ड फूड प्रोसेसिंग हब के रूप में विकसित करने की योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि प्रस्तावित परियोजना को आगे बढ़ाया जाता है तो क्षेत्र में पहले से मौजूद पोहा उद्योग को आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग और ब्रांडिंग से जोड़कर बड़े बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है।

 

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