धमतरी (खबरगली) देशभर में दीपावली के जश्न से एक सप्ताह पहले छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा-सी गांव में दीपों का पर्व धूमधाम से मनाया जा चुका है। यहां 3 नवंबर को ही हर घर में दीप जले, मकान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाए और लक्ष्मी पूजा के बाद आतिशबाजी के साथ खुशियां मनाई गईं। खास बात यह है कि यहां सिर्फ दिवाली ही नहीं, बल्कि होली, हरेली और पोला जैसे प्रमुख त्योहार भी तय तारीख से सात दिन पहले ही मनाए जाते हैं।
अनूठी परंपरा के पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी
इस अनूठी परंपरा के पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी है। ग्रामीणों के अनुसार, सदियों पहले यह गांव घने जंगलों से घिरा हुआ था और जंगली जानवरों का भयंकर खतरा रहता था। उस दौरान 'सिरदार' नाम के एक व्यक्ति ने ग्रामीणों की रक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। मान्यता है कि बाद में गांव के पुजारी को सपने में सिरदार देव ने दर्शन दिए और गांव की खुशहाली के लिए सभी प्रमुख त्योहार एक सप्ताह पहले मनाने का आदेश दिया।
आबादी से ज्यादा पहुंचते हैं मेहमान
सेमरा-सी की यह दिवाली अब आसपास के 15 से 20 गांवों के लोगों के लिए भी एक बड़ा उत्सव बन चुकी है। त्योहार के दिन राजनांदगांव समेत दूर-दराज से रिश्तेदार और श्रद्धालु अपने ननिहाल व परिवार के बीच दीपावली मनाने पहुंचते हैं। कई बार मेहमानों की यह संख्या खुद गांव की कुल आबादी से भी अधिक हो जाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में मेल-मिलाप और उत्सव का अनूठा माहौल देखने को मिलता है।
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