छत्रपति संभाजीनगर (खबरगली ) महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। तिसगांव इलाके की खवड्या पहाड़ी पर पारिवारिक विवाद के बाद एक युवक के संकट में पड़ने से उसके माता-पिता भी हादसे का शिकार हो गए। इस घटना में कुणाल चांदगुडे, उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, घटना से पहले कुणाल का अपने माता-पिता से महंगे मोबाइल फोन को लेकर विवाद हुआ था। बताया जा रहा है कि कुणाल के पास पहले से iPhone था, लेकिन वह नया और अपडेटेड मॉडल लेना चाहता था। पुराने फोन की कुछ किश्तें भी बकाया होने की बात सामने आई है।
iPhone को लेकर परिवार में बढ़ा विवाद
परिवार से सामने आई जानकारी के अनुसार, कुणाल की मोबाइल फोन को लेकर अपने माता-पिता से बहस हुई थी। उसके पिता मुरलीधर ट्रक ड्राइवर थे और काम के सिलसिले में अक्सर घर से बाहर रहते थे। पिता के घर लौटने के बाद विवाद और बढ़ गया। बताया जा रहा है कि परिवार में इस मुद्दे को लेकर करीब दो दिनों तक तनाव की स्थिति बनी रही। शुक्रवार सुबह विवाद के बाद कुणाल खवड्या पहाड़ी की ओर चला गया और वहां बेहद तनावपूर्ण स्थिति में पहुंच गया। उसने खुद को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी, जिसके बाद परिवार और प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई।
करीब 3 घंटे तक पुलिस, दमकल और ग्रामीणों ने समझाया
कुणाल के पहाड़ी पर पहुंचने की सूचना मिलने के बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड, ग्रामीण और उसके माता-पिता मौके पर पहुंचे। सभी ने काफी देर तक उसे समझाने और सुरक्षित वापस लाने की कोशिश की।
मां ने हाथ जोड़कर बेटे से की वापस आने की अपील
परिवार के मुताबिक, मां संगीता ने बेटे से भावुक अपील करते हुए कहा कि अगर उसे पिता से परेशानी है तो वह उसके साथ रहने के लिए तैयार हैं। संगीता ने यहां तक कहा कि वह अपना मंगलसूत्र उतारकर फेंक देंगी और पति को छोड़ देंगी. लेकिन कुणाल ने कहा कि उसकी बात कोई नहीं सुनता और अब उसे जीने में दिलचस्पी नहीं है उन्होंने उसे समझाने की हर संभव कोशिश की। परिवार की ओर से उसकी आर्थिक समस्या और iPhone की किश्तों को लेकर भी समाधान का भरोसा दिलाया गया। इसके बावजूद कुणाल बेहद तनाव में था और लगातार अपनी बात पर अड़ा रहा। करीब तीन घंटे तक समझाने का दौर चला।
बेटे को बचाने की कोशिश में पिता भी हादसे का शिकार
पुलिस और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में कुणाल को सुरक्षित नीचे लाने की कोशिश जारी थी। इसी दौरान उसके पिता मुरलीधर उसके करीब पहुंचे और बेटे को बचाने का प्रयास किया। इसी दौरान दोनों हादसे का शिकार हो गए। पति और बेटे को संकट में देखकर मां संगीता भी सदमे में आ गईं और इसके बाद वह भी हादसे की चपेट में आ गईं। घटना में कुणाल, मुरलीधर और संगीता की मौत हो गई। पुलिस ने तीनों के शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
अस्पताल में भाई का शव देखकर बहन की आंखों से छलके
आंसू घटना के बाद अस्पताल में मुरलीधर का शव देखकर उनकी बहन फूट-फूटकर रो पड़ीं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि कुछ ही दिनों बाद राखी का त्योहार है और अब वह अपने भाई को किसे फोन करेंगी। परिवार के लिए यह सदमा इसलिए भी बेहद गहरा है क्योंकि कुछ साल पहले वे अपने एक बेटे को भी खो चुके थे। अब कुणाल की मौत के साथ परिवार का दूसरा बेटा भी चला गया। मुरलीधर परिवार की जिम्मेदारी संभालते थे और ट्रक चलाकर घर का खर्च चलाते थे।
छह साल पहले भी परिवार ने खोया था एक बेटा
इसघटना का एक और दर्दनाक पहलू सामने आया है। परिवार करीब छह साल पहले भी अपने एक बेटे को खो चुका था। अब दूसरे बेटे कुणाल की मौत ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। बेटे को बचाने की कोशिश में पिता की भी जान चली गई और इसके बाद मां की मौत ने इस घटना को और भी दुखद बना दिया।
छत्रपति संभाजीनगर की घटना ने खड़े किए गंभीर सवाल
छत्रपति संभाजीनगर की यह घटना परिवारों के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मोबाइल फोन जैसी वस्तु को लेकर शुरू हुआ विवाद किस तरह गहरे भावनात्मक संकट में बदल गया, यह पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। तीन लोगों की मौत से परिवार और आसपास के इलाके में शोक का माहौल है।
ऐसे संकट की स्थिति में क्या करें?
यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक विवाद की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि आर्थिक दबाव, पारिवारिक तनाव और भावनात्मक संकट की स्थिति में समय पर बातचीत और मदद कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। किसी महंगे सामान की मांग, कर्ज या EMI का दबाव अथवा परिवार में विवाद जीवन से बड़ा नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय उसके साथ रहना, बहस या डांटने के बजाय उसकी बात शांतिपूर्वक सुनें। तुरंत परिवार के भरोसेमंद सदस्य या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ को शामिल करें। आर्थिक समस्या हो तो परिवार के साथ बैठकर व्यावहारिक समाधान तलाशें। यदि किसी व्यक्ति से तत्काल खतरे की आशंका हो तो स्थानीय आपातकालीन सहायता और पुलिस से संपर्क करें।
मुफ्त और गोपनीय मानसिक स्वास्थ्य सहायता (भारत में)
यदि आप या आपका कोई परिचित किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, अवसाद या संकट से गुजर रहा है, तो इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
किरण (Kiran) - भारत सरकार की हेल्पलाइन: 1800-599-0019 (24/7 उपलब्ध)
टेली-मानस (Tele-MANAS): 14416 या 1800-891-4416 (24/7 उपलब्ध) यह सेवा प्रशिक्षित काउंसलर के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता उपलब्ध कराती है।
वंद्रेवाला फाउंडेशन (Vandrevala Foundation): +91 9999 666 555 आसरा (AASRA): +91 98204 66726
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