पर्यटन स्थलों का विकास अब ‘फाइल’ से नहीं, ‘फील्ड’ से तय होगा: सौमिल रंजन चौबे

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अधिकारी बनेंगे पर्यटक, खुद जांचेंगे सड़क, शौचालय, नेटवर्क और सुविधाएं

रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों के विकास का तरीका अब बदलने की तैयारी है। अब किसी पर्यटन स्थल की तस्वीर सिर्फ सरकारी फाइलों, रिपोर्टों और उपलब्ध सुविधाओं की सूची से तय नहीं होगी, बल्कि अधिकारी खुद पर्यटक बनकर मौके पर पहुंचेंगे और वहां की वास्तविक स्थिति का अनुभव करेंगे। छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों का व्यापक ‘डेस्टिनेशन गैप असेसमेंट’ शुरू किया है।

पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किसी पर्यटन स्थल पर आने वाले पर्यटक को वास्तव में कहां परेशानी होती है और उन समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर कैसे दूर किया जा सकता है।

सिर्फ सुविधा मौजूद है या वास्तव में काम भी कर रही है?

अधिकारी खुद करेंगे पर्यटक की तरह पूरा सफर

डेस्टिनेशन गैप असेसमेंट की सबसे खास बात यह है कि अधिकारी केवल स्थानीय अधिकारियों से जानकारी लेकर रिपोर्ट तैयार नहीं करेंगे। वे खुद पर्यटन स्थल तक पहुंचेंगे और संभव हो तो ऐसे पर्यटक की तरह यात्रा करेंगे, जिसके पास अपनी कार नहीं है।

रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बस, ऑटो या साझा जीप मिलती है या नहीं, कितना किराया लगता है, कितना इंतजार करना पड़ता है और शाम को वापस लौटने की सुविधा है या नहीं—इन सभी पहलुओं को दर्ज किया जाएगा।

अधिकारी मौके पर शौचालय, पेयजल, पार्किंग, टिकट काउंटर, साइनेज, डिजिटल भुगतान और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाओं की भी वास्तविक स्थिति जांचेंगे। यानी कागज पर ‘शौचालय उपलब्ध’ लिखा होना पर्याप्त नहीं होगा। देखा जाएगा कि वह साफ है या नहीं, पानी उपलब्ध है या नहीं और महिलाओं के लिए लॉक व प्रकाश जैसी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं।

45 मिनट तक पर्यटकों को देखेंगे अधिकारी

‘Watch the Tourists’ से सामने आएगी असली तस्वीर

असेसमेंट में ‘Watch the Tourists’ नाम से एक खास अभ्यास भी शामिल किया गया है। अधिकारी लगभग 45 मिनट तक पर्यटकों को बिना हस्तक्षेप किए देखेंगे। वे यह समझने की कोशिश करेंगे कि पर्यटक कहां उतरते हैं, वाहन कहां पार्क करते हैं, किस रास्ते पर भ्रमित होते हैं, कहां बैठते हैं, क्या खरीदते हैं और कहां खाने-पीने की सुविधा तलाशते हैं। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग पर्यटकों को होने वाली परेशानियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही अधिकारियों को ऐसी कम से कम तीन समस्याएं दर्ज करनी होंगी, जो केवल मौके पर जाकर ही सामने आ सकती हैं।

पर्यटकों से सीधे पूछा जाएगा—सबसे पहले क्या बदलना चाहिए?

10 पर्यटकों से लिया जाएगा फीडबैक

हर पर्यटन स्थल पर कम से कम 10 वास्तविक पर्यटकों से बातचीत की जाएगी। उनकी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज नहीं की जाएगी। बातचीत का मकसद केवल पर्यटक अनुभव को समझना होगा। पर्यटकों से पूछा जाएगा कि वे कहां से आए, कैसे पहुंचे, कितनी देर रुक रहे हैं, कितना खर्च कर रहे हैं और उन्हें भोजन, पार्किंग, शौचालय, सुरक्षा, साइनेज, नेटवर्क तथा डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं में क्या अनुभव हुआ।

सबसे अहम सवाल होगा—“अगर आप इस जगह के प्रभारी होते तो सबसे पहले क्या सुधार करते?” इससे पर्यटन स्थलों की प्राथमिकताएं सरकारी नजरिए के साथ-साथ पर्यटकों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर भी तय की जा सकेंगी।

पर्यटन के साथ स्थानीय रोजगार पर भी रहेगा फोकस

पर्यटक रुकेगा ज्यादा, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा

पर्यटन बोर्ड केवल अधोसंरचना की कमियां नहीं खोजेगा, बल्कि यह भी देखेगा कि पर्यटन से स्थानीय लोगों की आय और रोजगार कैसे बढ़ाया जा सकता है। स्थानीय भोजन, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैफे, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, प्रशिक्षित गाइड, बोटिंग, ट्रेकिंग, साइकिलिंग, कैंपिंग और सांस्कृतिक गतिविधियों जैसी संभावनाओं की पहचान की जाएगी। जहां सुविधा नहीं है, वहां यह भी देखा जाएगा कि उसे स्थानीय युवा, स्व-सहायता समूह, कारीगर, आदिवासी समुदाय या निजी ऑपरेटर में से कौन संचालित कर सकता है।

लक्ष्य यह है कि पर्यटक सिर्फ मुख्य आकर्षण देखकर वापस न लौटे, बल्कि कुछ घंटे अधिक रुके, स्थानीय भोजन करे, खरीदारी करे, गतिविधियों में हिस्सा ले या रातभर ठहरे।

गैप मिलेगा तो समाधान भी तय होगा

‘Gap-to-Solution Matrix’ से तय होगी जिम्मेदारी और समय-सीमा

फील्ड असेसमेंट के बाद समस्याओं को केवल रिपोर्ट में दर्ज नहीं किया जाएगा। उनके समाधान के लिए ‘Gap-to-Solution Matrix’ तैयार की जाएगी। हर बड़ी समस्या के सामने संभावित समाधान, अनुमानित लागत, जिम्मेदार एजेंसी, फंडिंग स्रोत, आवश्यक स्वीकृति और समय-सीमा तय करने का प्रयास किया जाएगा। समस्याओं को तीन चरणों में बांटा जाएगा—0 से 3 माह में तत्काल सुधार, 3 से 12 माह में अल्पकालीन कार्य और 1 से 3 वर्ष में मध्यम अवधि के काम। हर पर्यटन स्थल के लिए तीन ‘Quick Wins’ भी चुने जाएंगे, यानी ऐसे छोटे सुधार जिनसे कम लागत में पर्यटक अनुभव में तुरंत बदलाव लाया जा सके।

“रिपोर्ट बनाना नहीं, जमीन पर बदलाव लाना लक्ष्य”

सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन स्थल की खूबसूरती महत्वपूर्ण है, लेकिन पर्यटक का पूरा अनुभव पहुंच, परिवहन, स्वच्छता, सुरक्षा, भोजन, नेटवर्क और वहां उपलब्ध गतिविधियों से मिलकर बनता है। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों को केवल फाइलों और प्रस्तावों से नहीं देखा जाएगा। अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर कमियों को समझेंगे और पर्यटकों व स्थानीय लोगों से सीधे फीडबैक लेंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गैप असेसमेंट अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि सुधार की शुरुआत है। पर्यटन बोर्ड का प्रयास रहेगा कि पहले कम समय और कम लागत में होने वाले जरूरी सुधार किए जाएं और बड़ी जरूरतों के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए। यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल कितने खूबसूरत हैं, बल्कि यह भी होगा कि वहां पहुंचने से लेकर वापस लौटने तक पर्यटक का अनुभव कितना बेहतर है।

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