रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच करीब चार दशकों से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद के समाधान की उम्मीद एक बार फिर बढ़ी है। ओडिशा दौरे पर गए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को कहा कि अब महानदी जल बंटवारे को लेकर विवाद जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है और केंद्र में भी एनडीए सरकार है। इसलिए कहीं कोई विवाद की स्थिति नहीं है और बहुत जल्दी इसका निपटारा होने वाला है। ओडिशा प्रवास के दौरान सीएम साय ने वहां के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से भेंट की।
28 सितंबर को अगली सुनवाई
महानदी विवाद के समाधान के लिए 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी। केंद्र ने संवाद, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के जरिए समाधान की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दिया था। इसके बाद केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में विस्तारित तकनीकी समिति बनाई गई। इसकी पहली बैठक 29 जुलाई को हुई थी और दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों के बीच आगे भी बैठकें हुई हैं। अब 21 सितंबर यानि आज तकनीकी टीमों की अगली बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद 28 सितंबर को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण में अगली सुनवाई होगी।
1983 से चल रहा है विवाद
महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और नदी ओडिशा से होकर बंगाल की खाड़ी में पहुंचती है। दोनों राज्यों के लिए सिंचाई, पेयजल, उद्योग और पर्यावरण की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण नदी है। यह विवाद साल 1983 से चल रहा है। यह विवाद मूल रूप से मध्य प्रदेश और ओडिशा के बीच था। विवाद का मौजूदा कानूनी चरण 2016 में तेज हुआ, जब ओडिशा सरकार ने केंद्र के समक्ष महानदी बेसिन के जल बंटवारे को लेकर शिकायत दर्ज कराई। केंद्र ने पहले बातचीत के जरिए समाधान के लिए 2017 में नेगोशिएशन कमेटी बनाई, लेकिन समाधान नहीं निकला। ओडिशा ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में मामला उठाया।
12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र ने 12 मार्च 2018 को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया। ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ में ऊपरी हिस्से में बांध और बैराज बनाए जाने से उसके हिस्से में आने वाले पानी का प्रवाह प्रभावित हुआ। छत्तीसगढ़ का पक्ष रहा है कि वह अपने हिस्से के पानी का ही उपयोग कर रहा है। विवाद के समाधान के लिए अब न्यायाधिकरण की प्रक्रिया के साथ-साथ केंद्रीय जल आयोग की निगरानी में तकनीकी बातचीत भी आगे बढ़ रही है।
नदी: महानदी
उद्गम: सिहावा (छत्तीसगढ़)
लंबाई: लगभग 851 किमी
विवाद: जल बंटवारा और बैराज निर्माण
कानूनी मंच: महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण
स्थिति: फैसला लंबित
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