'अंतर्कलह और गुटबाजी के 'डीएनए' के चलते पूरे कार्यकाल में अपनी 'पूर्ण कार्यसमिति' तक नहीं बना पाए कांग्रेस अध्यक्ष!: उज्ज्वल दीपक
रायपुर (खबरगली ) भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के कार्यकाल की समाप्ति पर कहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के कथित आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ कांग्रेस की कमान सम्भालने वाले दीपक बैज का तीन साल का कार्यकाल पूरी तरह विफल साबित हुआ है। श्री दीपक ने कहा कि गुटबाजी और अंतर्कलह के दलदल में धँसी कांग्रेस का यह हश्र होना ही था। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने तंज कसते हुए कहा कि एक तथाकथित बड़ा आदिवासी चेहरा अपने पूरे कार्यकाल में 10 उपाध्यक्ष, 23 महामंत्री और 252 सदस्यों वाली अपनी एक अदद 'पूर्ण कार्यकारिणी' तक गठित नहीं कर पाया! बिना टीम बनाए ही बैज की विदाई यह साबित करती है कि कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक ढाँचा पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुका है। बैज की इस बेबसी और विफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण खुद कांग्रेस का अपना पारम्परिक 'डीएनए' यानी बेलगाम गुटबाजी है।
श्री दीपक ने कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस आज पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत जैसे बड़े क्षत्रपों के अपने-अपने निजी खेमों में बँटी हुई है। इन दिग्गजों के अहम् और अपने करीबियों को उपकृत करने की होड़ के बीच बैज असहाय बने रहे। इन गुटों के बीच सामंजस्य बैठाना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित हुआ और उनके नेतृत्व में संगठन केवल कागजों और बयानों तक सिमट कर रह गया।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री उज्ज्वल दीपक ने बैज के राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके अध्यक्ष बनते ही कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह ढह गई। कांग्रेस के हाथ से न सिर्फ प्रदेश की सत्ता निकल गई, बल्कि खुद प्रदेश अध्यक्ष बैज अपनी पारंपरिक चित्रकोट सीट तक नहीं बचा पाए! बाद में राज्य की 11 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस महज एक सीट पर सिमट गई और संगठन का सूपड़ा साफ हो गया। फिर नगरीय निकाय व पंचायत चुनाव में भी लगातार मिली हार ने यह साफ कर दिया कि कांग्रेस का जनाधार धरातल से पूरी तरह गायब हो चुका है।
श्री उज्ज्वल दीपक ने कहा कि कांग्रेस की यह गुटबाजी आज भी शांत होने का नाम नहीं ले रही है। हर नेता सिर्फ अपनी ढपली और अपना राग अलाप रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता ने जिस तरह कांग्रेस के कुशासन को उखाड़ फेंका था, ठीक उसी तरह अब कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी अपने ही नेतृत्व को नकार दिया है।
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