कांग्रेस का आरोप: पिछले साल की घोषणाओं की ईंट तक नहीं लगी, नया बजट सिर्फ घोषणाओं का अंबार
बजट में युवाओं-महिलाओं को 'झुनझुना', बस्तर-सरगुजा को 'मित्रों' के हवाले करने की तैयारी
AIIMS और IIT की तर्ज वाले संस्थानों का अता-पता नहीं, उद्योगपतियों की तिजोरी भरने वाला बजट
रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसे जुमलों की पतंग बताया। कांग्रेस नेताओं ने बजट को जनता को निराश करने वाला और जमीनी हकीकत से दूर बताया है। उन्होंने बजट को 'ज्ञान-गति की दुर्गति' के बाद 'संकल्प' का नया जुमला करार दिया। जनता जुमलों की पतंग काट देगी, वहीं छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछला बजट प्रदेश को आगे ले जाने वाला 'गति' का बजट नहीं, बल्कि प्रदेश की 'दुर्गति' करने वाला बजट रहा । उन्होंने इसे जन-कल्याण के संकल्प के बजाय भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला दस्तावेज करार दिया। जबकि सुशील आनंद शुक्ला, सुरेंद्र वर्मा, धनंजय सिंह ठाकुर और वंदना राजपूत ने इसे रोजगार-शिक्षा-कृषि-महिला सुरक्षा पर खाली, कॉर्पोरेट फायदे वाला और काल्पनिक बताया।
डॉ. महंत ने कहा कि बजट में प्रदेश के शिक्षित बेरोजगारों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है। प्रदेश की महतारी वंदन (डी.एड.) की महिलाएं अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, लेकिन सरकार उन्हें राहत देने के बजाय जेल में डाल रही है। बजट में महिलाओं और युवाओं को नौकरी के नाम पर सिर्फ 'झुनझुना' पकड़ाया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार बस्तर और सरगुजा के प्राकृतिक संसाधनों को अपने उद्योगपति मित्रों के हवाले करने की योजना बना रही है। उन्होंने जगदलपुर के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने निर्मित अस्पताल भवन को बुनियादी ढांचे सहित हैदराबाद की एक निजी एजेंसी को किराए पर देने का निर्णय लिया है।
उन्होंने आशंका जताई कि बजट में घोषित दो नई 'एजुकेशन सिटी' का हश्र भी कहीं निजीकरण जैसा न हो। डॉ. महंत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा, "पिछले बजट में एम्स (AIIMS) की तर्ज पर 4 सिम्स (SIMS) और आईआईटी (IIT) की तर्ज पर 4 सीआईटी (CIT) खोलने की घोषणा की गई थी, लेकिन साल भर में एक ईंट तक नहीं जुड़ी। वर्तमान मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के बजाय नए कॉलेज की घोषणा केवल दिखावा है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजधानी रायपुर मेकाहारा में करोड़ो की मशीने टेक्निशियन के अभाव में धूल खा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गांवों का प्रदेश है, लेकिन वित्त मंत्री का पूरा बजट भाषण रायपुर और नवा रायपुर की सड़कों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया। बजट में एक भी गांव की सड़क का नाम नहीं लिया गया। प्रदेश के 30 स्कूल शिक्षक विहीन हैं, जिनमें मुख्यमंत्री के जिले के स्कूल भी शामिल हैं, लेकिन शिक्षकों की भर्ती पर सरकार मौन है।
डॉ. महंत ने अंत में कहा कि वित्त मंत्री ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चुप्पी साध ली है। यह बजट पूरी तरह से 'कैरिड-फॉरवर्ड' स्कीम है, जिसमें जनता के लिए कोई सार्थक विकल्प मौजूद नहीं है।
अन्य कांग्रेस नेताओं ने यह कहा
वहीं प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बजट में रोजगार, शिक्षा और कृषि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने वित्त मंत्री पर केंद्रीय योजनाओं का श्रेय लेने का आरोप लगाया। शुक्ला ने 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये के बजट में नए रोजगार के अवसर न होने की बात कही। उन्होंने मुख्यमंत्री बस योजना के लिए मात्र 10 करोड़ रुपये के प्रावधान को सरकार की गंभीरता की कमी बताया। बस्तर विकास प्राधिकरण के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी अपर्याप्त बताया गया। राजधानी रायपुर में ऊपरी पुल और राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के लिए भी कम राशि का आवंटन किया गया है। आयुष्मान भारत के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान अस्पतालों की उधारी के लिए भी कम है। साय सरकार का यह तीसरा बजट भी जनता को निराश करने वाला साबित हुआ है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने बजट को निगम मुनाफा और संसाधनों की लूट का संकल्प बताया। उन्होंने कहा कि आयरन स्टील और कृषि आधारित इकाइयों के संरक्षण के लिए कुछ नहीं है। अनियमित और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा भी पूरा नहीं हुआ। रसोइया संघ और महिलाओं के लिए भी बजट में कोई विशेष प्रावधान नहीं है।
महिलाओं और विकास योजनाओं की अनदेखी
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने बजट को महिलाओं के लिए निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा और रोजगार के लिए कोई विशेष पैकेज नहीं है। रानी दुर्गावती योजना भी अस्पष्ट है। 500 रुपये में रसोई गैस सिलिंडर के वादे के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। धनंजय सिंह ठाकुर ने जनकल्याणकारी मदों की उपेक्षा कर उद्योग विभाग का बजट तीन गुना करने पर सवाल उठाया।
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