नई दिल्ली (खबरगली) ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर 12 फरवरी को देशव्यापी भारत बंद आयोजित किया गया है। इस हड़ताल के चलते सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। यूनियनों का कहना है कि सरकार की श्रम नीतियां और अन्य फैसले मजदूरों के अधिकारों तथा सामाजिक सुरक्षा को कमजोर कर रहे हैं, जिसके विरोध में यह बंद बुलाया गया है।
भारत बंद के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, सरकारी कार्यालय, परिवहन सेवाएं और कुछ औद्योगिक इकाइयों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। विशेष रूप से केरल और ओडिशा जैसे राज्यों में व्यापक प्रभाव की संभावना जताई जा रही है। यूनियनों का दावा है कि इस हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूर शामिल हो सकते हैं और 600 से अधिक जिलों में बंद का असर दिखेगा।
दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच—AITUC, INTUC, CITU, HMS, TUCC, SEWA, AIUTUC, AICCTU, LPF और UTUC—ने इस बंद का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा, कृषि मजदूर संगठन, छात्र और युवा समूहों ने भी इसका समर्थन किया है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में चार नए लेबर कोड वापस लेना, MGNREGA को मजबूत करना और पुरानी पेंशन योजना लागू करना शामिल है।
किसान संगठनों ने ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और अन्य नीतियों को वापस लेने की मांग उठाई है। साथ ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी चिंता जताई गई है, जिससे सस्ते आयात बढ़ने और किसानों की आय प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है।
हालांकि अस्पताल, एंबुलेंस, मेट्रो, रेल सेवाएं, निजी कार्यालय और शैक्षणिक संस्थान सामान्य रूप से संचालित हो सकते हैं। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है और नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
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