लोकेश कावाड़िया की मेहनत रंग लाई, दिव्यांगजनों से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दों पर शासन स्तर पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ
रायपुर (खबरगली ) छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजनों के अधिकारों और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावाड़िया की लगातार कोशिशों के बाद दिव्यांगजनों से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दों पर शासन स्तर पर कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है। इनमें फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों की जांच और पात्र दिव्यांगजनों को यूडीआईडी (UDID) कार्ड उपलब्ध कराने का मुद्दा प्रमुख है। दिव्यांगजनों की समस्याओं को लेकर लंबे समय से चल रहे धरने के बीच लोकेश कावाड़िया के हस्तक्षेप के बाद सकारात्मक संवाद शुरू हुआ। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री के साथ उच्चस्तरीय बैठकों में इन मुद्दों पर चर्चा हुई और समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया।
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों की जांच होगी
दिव्यांगजन संगठनों की ओर से लगातार यह चिंता जताई जा रही थी कि कुछ लोग नियमों के विपरीत फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र हासिल कर सरकारी रोजगार और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। इससे वास्तविक रूप से दिव्यांग लोगों के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है।
संभाग स्तर पर मेडिकल बोर्ड से जांच का आश्वासन
इस गंभीर विषय को लोकेश कावाड़िया ने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया। दस्तावेज के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री की ओर से अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप संभाग स्तर के मेडिकल बोर्ड से प्रमाण-पत्रों की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे संदिग्ध प्रमाण-पत्रों की वैधता की जांच हो सकेगी और पात्र दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
सभी पात्र दिव्यांगजनों को मिलेगा UDID कार्ड
दिव्यांगजनों के लिए दूसरा बड़ा मुद्दा यूडीआईडी कार्ड से जुड़ा है। UDID यानी Unique Disability ID दिव्यांगजनों की पहचान और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। दस्तावेज में उल्लेख है कि स्वास्थ्य मंत्री के साथ लगातार बैठकों के बाद दिव्यांगजनों की जनसंख्या के अनुरूप समस्त पात्र दिव्यांगजनों को UDID कार्ड उपलब्ध कराने की परियोजना पर सहमति तैयार की गई है। इस कार्य के लिए छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया गया है।
UDID कार्ड से दिव्यांगजनों को क्या फायदा?
UDID व्यवस्था का उद्देश्य दिव्यांगजनों की पहचान को एकीकृत करना और सरकारी सेवाओं तथा योजनाओं तक उनकी पहुंच को आसान बनाना है। पात्र लोगों को पहचान संबंधी दस्तावेज के लिए बार-बार अलग-अलग प्रक्रियाओं से गुजरने की परेशानी कम हो सकती है।
दिव्यांग अधिकार अधिनियम के उल्लंघन का मुद्दा भी उठा
दिव्यांग संघों की ओर से अध्यक्ष लोकेश कावाड़िया से संपर्क कर यह विषय भी सामने रखा गया कि कुछ लोग दिव्यांग अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल प्रमाण-पत्र हासिल कर शासकीय रोजगार एवं अन्य सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद प्रमाण-पत्रों की जांच की दिशा में कदम उठाने का आश्वासन मिला।
दिव्यांग संगठनों ने लोकेश कवाड़िया का जताया आभार
दिव्यांग संगठनों ने इन मुद्दों को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने और समाधान की दिशा में पहल करने के लिए लोकेश कवाड़िया के प्रति आभार जताया है। संगठनों का कहना है कि वास्तविक दिव्यांगजनों को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रमाण-पत्र व्यवस्था में पारदर्शिता और UDID कार्ड की आसान उपलब्धता बेहद जरूरी है।
तीन मांगों पर बनी समाधान की उम्मीद
दिव्यांगजनों की मांगों को लेकर हुई पहल से अब तीन प्रमुख क्षेत्रों में उम्मीद जगी है—फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों की जांच, पात्र दिव्यांगजनों को UDID कार्ड उपलब्ध कराना और दिव्यांग अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का प्रभावी पालन। यदि इन आश्वासनों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे छत्तीसगढ़ के दिव्यांगजनों को सरकारी योजनाओं, रोजगार और अधिकारों से जुड़ी व्यवस्थाओं में अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिल सकती है।
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