तीनों सेना प्रमुखों के साथ की हाई-लेवल मीटिंग, भारत की सुरक्षा रणनीति पर मंथन
नई दिल्ली (खबरगली ) पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए 'रेड सिग्नल' बन गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को तीनों सेना प्रमुखों (सीडीएस, थलसेना, वायुसेना और नौसेना प्रमुख) और DRDO अध्यक्ष के साथ एक आपातकालीन समीक्षा बैठक की। बैठक में न केवल सैन्य रणनीति, बल्कि युद्ध के कारण भारत की आर्थिक सुरक्षा और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले गंभीर खतरों पर भी चर्चा की गई।
1. ऊर्जा सुरक्षा
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का डर भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
पेट्रोल-डीजल के दाम: अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें अस्थिर हो गई हैं। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
मुद्रास्फीति (Inflation): ईंधन महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिससे खाने-पीने की चीजों समेत आम जरूरत की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर संकट
यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग है। ईरान द्वारा इस मार्ग पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने से भारत का निर्यात-आयात बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। व्यापारिक मार्ग का बाधित होना: भारत का अधिकांश तेल आयात इसी संकरे रास्ते से होता है। इसके बंद या असुरक्षित होने का मतलब है—भारत की 'एनर्जी लाइफलाइन' का कटना।
बीमा और फ्रेट चार्ज: युद्ध क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों का 'इंश्योरेंस प्रीमियम' और 'शिपिंग फ्रेट' बढ़ गया है, जिससे आयातित सामान की लागत बढ़ रही है।
3. सप्लाई चेन और निर्यात पर असर इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल की कमी
पश्चिम एशिया से होकर आने वाले पुर्जों और कच्चे माल की सप्लाई चेन टूटने से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, विशेषकर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर दबाव बढ़ेगा। भारतीय निर्यात: यूरोप और खाड़ी देशों को होने वाला भारतीय निर्यात (जैसे अनाज, चाय, और इंजीनियरिंग गुड्स) देरी का सामना कर रहा है, जिससे भारतीय व्यापारियों को भारी नुकसान की आशंका है।
4. पीएम मोदी की चिंता और सरकार का कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इसे "चिंताजनक" बताते हुए संकेत दिया है कि सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और नए व्यापार मार्गों पर विचार कर रही है। रक्षा मंत्री की बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भारतीय नौसेना समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहे, ताकि व्यापारिक जहाजों (Merchant Vessels) को सुरक्षा कवच दिया जा सके। भारत न केवल अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए रणनीति बना रहा है, बल्कि इस युद्ध से पैदा होने वाले आर्थिक झटकों को कम करने के लिए 'प्लान-बी' पर भी काम कर रहा है।
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