नक्सलमुक्त बस्तर अब ले रहा विकास की सांस, जगदलपुर में अमित शाह की अध्यक्षता में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक संपन्न

Naxal-free Bastar is now breathing the air of development; Central Regional Council meeting concluded in Jagdalpur under the chairmanship of Amit Shah, Chhattisgarh, Khabargali

जगदलपुर (खबरगली ) बस्तर के एक निजी होटल में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हो गई है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की। बैठक में मध्य भारत के चार प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत चारों राज्यों के मुख्य सचिव विशेष रूप से शामिल हुए।

विकास और सहयोग पर महामंथन संयुक्त विकास

चारों राज्यों के चौमुखी विकास (डेवलपमेंट) पर विस्तार से चर्चा हुई।

भविष्य की योजनाएं: राज्यों में चल रहे और आगामी विकास कार्यों को लेकर गहन मंथन किया गया.

परस्पर तालमेल: अंतर-राज्यीय मुद्दों को सुलझाने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

बस्तर में अब उत्साह और खुशी का माहौल है: अमित शाह

क्षेत्रीय मध्य परिषद की बैठक खत्म होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रेस कांफ्रेंस के जरिए बस्तर के विकास का खाका मीडिया के सामने रखा. अमित शाह ने कहा, ''31 मार्च 2026 के बाद मैं पहली बार बस्तर आया हूं. यहां मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक थी. कल से मैं यहां पर हूं. हर जगह बस्तर की जनता में उत्साह और विश्वास नजर आ रहा है. भय का माहौल और बंदूकों के साए में जीवन जीने का समय अब खत्म हो चुका है. बस्तर अब विकास की सांस ले रहा है. बस्तर नक्सलमुक्त हो चुका है.''

 कांग्रेस सरकार ने नहीं की मदद

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ''13 दिसंबर 2023 को छत्तीसढ़ में बीजेपी की सरकार बनी. यहां पर विष्णु देव जी की सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू हुआ. इसके पहले जो कांग्रेस की सरकार थी उसने हमारी मदद नहीं की. नक्सलवाद के खात्मे में योगदान नहीं दिया.''

तीन अहम तारीखों का किया जिक्र

अमित शाह ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान तीन अहम तारीखों का भी जिक्र किया. शाह ने कहा कि ये तीन तारीखें ऐसी हैं जिन तारीखों के बीच हमने बस्तर के विकास और नक्सलवाद के अंत की लक्ष्मण रेखा खीची.

24 अगस्त 2024: सभी राज्यों के डीजी के साथ हमने बैठक की. इस बैठक में हमने तय किया कि 31 मार्च 2026 को भारत से नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म कर देंगे.

31 मार्च 2026:बस्तर में तैनात वीर जवानों और बस्तर की जनता के सहयोग से हमने अपने तय लक्ष्य को हासिल किया. आज हम नक्सलमुक्त भारत और बस्तर में खड़े हैं. इसके पीछे हजारों जवानों और लोगों की शहादत है.

19 मई 2026: नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर को बाकी राज्यों की तरह विकसित किया जाए इसके लिए ग्रास रूट लेवल पर विकास के कामों को लॉन्च किया गया.आज यहां से विकसित बस्तर के सूर्योदय की शुरूआत हो रही है. निर्दोष लोगों का खून नक्सलियों ने बहाया. लेकिन आज बस्तर के भीतर नया सूर्योदय विकास का हुआ है. बस्तर की जनता को आगाह करना चाहता हूं कि जो भेष बदलकर और नाम बदलकर आएंगे उनको पहचानें. सरकार ही विकास करेगी.

70 कैंपों को बनाया जाएगा सेवा डेरा

अमित शाह ने कहा कि बस्तर केरल जितना बड़ा है लेकिन समस्या उतनी भी जटिल थी. इस समस्या को सुलझाने के लिए हमने 200 सुरक्षा कैंप स्थापित किए.अब बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है. अब 200 में से 70 कैंपों को वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा के रूप में परिवर्तित करेंगे. सरकारी सुविधाओं को बस्तर के हर आदिवासी के घर तक ले जाएंगे. सेवा डेरा के जरिए बैंकिंग की सुविधा मिलेगी. राज्य और केंद्र की योजनाओं का लाभ मिलेगा.

सेवा डेरा के जरिए मिलेगी सुविधाएं

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, सेवा डेरा के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. आंगनबाड़ी की सुविधा भी सेवा डेरा के जरिए मिलेगी. विकास के सभी काम एक जगह पर उपलब्ध होंगे. 50 साल से जो सुविधाएं बस्तर के लोगों को नहीं मिली थी, उसे हम यहां पहुंचाएंगे. आर्थिक गतिविधियों का केंद्र इस सेवा डेरा को बनाएंगे. सिलाई प्रशिक्षण, इमली प्रोसेसिंग का काम भी यहां सिखाया जाएगा. विकास की भागीदारी में महिलाओं की अहम भूमिका होगी.

महिलाओं को डेयरी उद्योग से जोड़ा जाएगा

अमित शाह ने कहा कि गांव में डेयरी उद्योग खड़ा किया जाएगा. हर आदिवासी महिला को पशु (एक गाय एक भैंस) दिया जाएगा और उनके दूध को डेयरी के जरिए खरीदा जाएगा. कॉपरेटिव तरीके से इस दूध को बेचा जाएगा. इसके लिए केंद्र स्तर पर तैयारी की गई है. अगले छह महीने में डेयरी का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया जाएगा. पहले जहां बंदूक के साये थे वहां पर विकास का काम शुरू होगा. नक्सल आंदोलन के चलते जहां विकास नहीं हुआ उसे पूरा किया जाएगा.

वन उपज को बढ़ावा दिया जाएगा

अमित शाह ने कहा कि हम गांव गांव तक बिजली और पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं.वन उपज को कॉपरेटिव तरीके से डेवलप करेंगे उसका फायदा आदिवासियों को मिले ये सुनिश्चित करेंगे.शाह ने कहा कि मोदी जी खुद बस्तर के विकास को लेकर सक्रिय हैं.

12 हजार 211 किमी तक सड़कें बनी 

अमित शाह ने कहा, 12 हजार 211 किमी सड़कों का निर्माण बस्तर में पूरा कर दिया गया है. कुल 13 हजार मोबाइल टावर लगाने हैं. जिसमें 5 हजार मोबाइल टावर नक्सल प्रभावित इलाकों में लग भी चुके हैं. बैंक और पोस्ट ऑफिस भी खोलने का लक्ष्य इन इलाकों में रखा गया है. स्किल डेवलपेंट के सेंटर भी खुल चुके हैं. 90 हजार लोगों को स्किल डेवलपेंट का कोर्स कराया जा चुका है. बस्तर में सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल भी खुल चुका है. हम बस्तर के विकास की कार्ययोजना को लेकर काम कर रहे हैं.

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि हम तीन लक्ष्यों को लेकर चल रहे हैं

पहला लक्ष्य विकास और सुरक्षा का, दूसरा लक्ष्य युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण का,तीसरा लक्ष्य जनजातिय संस्कृति को बढ़ावा और संरक्षण देना बस्तर 30 से 40 सालों से बाकी राज्यों से पिछड़ा हुआ है. हम विकास योजनाओं के जरिए पांच से छह गुना ज्यादा विकास का काम करेंगे.

आदिवासी संस्कृति को सहेजना हमारी जिम्मेदारी

अमित शाह ने कहा, आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए हमने बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक को शुरू किया. इस प्लेटफार्म पर हजारों लोगों ने हिस्सा लिया. गांव से लेकर संभाग स्तर के लोग इससे जुड़े. दो बस्तर ओलंपिक आयोजित हो चुके हैं. पिछली बार 3 लाख 94 हजार खिलाड़ी बस्तर संभाग में भाग ले चुके हैं. पीएम मोदी ने कहा है कि हमें सुरक्षा से विश्वास और विश्वास से विकास, समृद्धि से संतृप्ति तक की यात्रा तय करनी है. एक्सपर्ट की मदद से इसके लिए वैज्ञानिक रोड मैप बनाया गया है. हिंसा किसी भी बात का समाधान नहीं है, लोकतांत्रिक मूल्य आधारित जीवन ही विकास का आधार हो सकता है. नक्सलवाद गरीबी के कारण नहीं फैला था. नक्सलवाद के कारण गरीबी बढ़ी. यहां स्कूल, सड़कें और अस्पताल इसलिए नहीं बने क्योंकि इन लोगों ने उनको बमों से उड़ा दिया. बैंकों को लूट लिया था.

20 करोड़ खर्च कर एक स्किल सेंटर बनाया गया

अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद को लेकर कई लोगों की राय थी कि विकास कई गांवों तक नहीं पहुंचा जिसके चलते नक्सलवाद पनपा. लेकिन नक्सलवाद के चलते कई गांव विकास से दूर रहे ये असली सच्चाई है. शाह ने आगे कहा कि 20 करोड़ खर्च कर एक स्किल सेंटर बनाया गया है, जहां सरेंडर माओवादियों को स्किल डेवलपेंट कराया जा रहा है. उनकी काउंसलिंग भी कराई जा रही है. ये बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसपर काम जारी है.

जानिए क्या है क्षेत्रीय मध्य परिषद और क्यों अहम होती है इसकी बैठक

क्षेत्रीय मध्य परिषद यानी सेंट्रल जोनल काउंसिल की बैठक गृह मंत्रालय के द्वारा बुलाई जाती है. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री करते हैं. क्षेत्रीय मध्य परिषद में मुख्य रूप से चार राज्य शामिल हैं, जिसमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल है. पिछली बैठक उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुई थी. इस बैठक में सभी चारों राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं. बैठक का उद्देश्य चारों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाना और नीतिगत मामलों पर चर्चा करना होता है. बैठक के जरिए राज्यों के बीच भूमि, जल, रेल आदिवासी कल्याण और डिजिटिल गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों को सुलझाना है.

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