रायपुर (खबरगली) रायपुर में प्रतिदिन निकलने वाले लगभग 750 टन कचरे के निपटान की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। गीले कचरे से बायोगैस तैयार करने के लिए नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम कुर्रू में जमीन आवंटित की गई है। प्लांट के निर्माण पर करीब 150 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। परियोजना के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी हिंदुस्तान पेट्रोलियम कंपनी को दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले प्लांट के लिए रावांभाठा के पास करीब पांच एकड़ जमीन तय की गई थी, लेकिन बाद में उस स्थान को निरस्त कर दिया गया।
हर दिन निकलता है 750 टन कचरा
रायपुर नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन लगभग 750 टन कचरा निकलता है। इस कचरे के निष्पादन और प्रसंस्करण के लिए संकरी में प्लांट संचालित किया जा रहा है, जिसका ठेका रामकी कंपनी के पास है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संकरी प्लांट में प्रतिदिन लगभग 20 टन कम्पोस्ट तैयार किया जाता है। इसे फर्टिलाइजर कंपनियां खरीदती हैं। इसके अलावा करीब 200 टन आरडीएफ यानी रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल सीमेंट प्लांटों में ईंधन के रूप में भेजा जाता है।
इस व्यवस्था के जरिए कचरे के एक बड़े हिस्से का पुनर्चक्रण और उपयोग किया जा रहा है। हालांकि, गीले कचरे के निपटान के लिए अलग से बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई है, ताकि कचरे का बेहतर उपयोग किया जा सके।
गीले कचरे से तैयार होगी बायोगैस
बायोगैस प्लांट का उद्देश्य गीले कचरे को संसाधित कर उससे उपयोगी ऊर्जा तैयार करना है। इससे कचरे के वैज्ञानिक निपटान को बढ़ावा मिल सकता है और लैंडफिल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इस परियोजना के लिए नगर निगम रायपुर, छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन यानी एमओयू किए जाने की जानकारी दी गई है। इसी व्यवस्था के तहत प्लांट का निर्माण, संचालन और रखरखाव किया जाना है। अपर आयुक्त विनोद पांडेय के अनुसार, नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम कुर्रू में प्लांट स्थल पर बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जा रहा है।
पहले रावांभाठा के पास तय हुई थी जमीन
बायोगैस प्लांट के लिए पहले रावांभाठा के पास करीब पांच एकड़ जमीन निर्धारित की गई थी। हालांकि, बाद में उस स्थान को निरस्त कर दिया गया और अब नवा रायपुर के ग्राम कुर्रू में जमीन आवंटित की गई है। नई जगह पर बाउंड्रीवाल निर्माण का काम शुरू होने से परियोजना की शुरुआती तैयारियां आगे बढ़ रही हैं। करीब 150 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना से गीले कचरे के निपटान और उससे ऊर्जा तैयार करने की व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
कचरा प्रबंधन में नई व्यवस्था की उम्मीद
रायपुर में रोजाना बड़ी मात्रा में कचरा निकलने के कारण उसके पृथक्करण, प्रसंस्करण और निपटान की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। फिलहाल शहर के सभी 70 वार्डों में सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई है। ऐसे में गीले कचरे से बायोगैस बनाने की परियोजना के साथ-साथ घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से कचरे का पृथक्करण भी जरूरी होगा। यदि गीला कचरा अलग-अलग एकत्र कर प्लांट तक पहुंचाया जाता है, तो उसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। परियोजना से जुड़ा अगला महत्वपूर्ण चरण: ग्राम कुर्रू में निर्माण कार्य पूरा होने, प्लांट की स्थापना और संचालन शुरू होने की समयसीमा स्पष्ट होने के बाद ही यह आकलन किया जा सकेगा कि इससे रायपुर के कचरा प्रबंधन पर कितना प्रभाव पड़ेगा।
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