रायपुर (खबरगली ) राजधानी रायपुर में इन दिनों यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए यातायात विभाग द्वारा चलाए जा रहे ई-चालान अभियान का आम जनता के बीच तीखा विरोध शुरू हो गया है। कैमरे के भरोसे काटे जा रहे इन चालानों में गंभीर त्रुटियों की शिकायत लेकर अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने रायपुर कमिश्नर और पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात की है। वकीलों ने सौंपे गए ज्ञापन में ई-चालान की प्रक्रिया को सुधारने और अव्यवहारिक जुर्माने की राशि में कटौती करने की मांग की है।
ई-चालान प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
शिकायतकर्ताओं और आम जनता का आरोप है कि केवल कैमरों के भरोसे गलत तरीके से चालान भेजे जा रहे हैं। लोगों की मुख्य शिकायतें निम्नलिखित हैं:
गलत उपस्थिति: कई लोगों को उस समय का चालान मिला है, जब वे उस स्थान पर मौजूद ही नहीं थे।
लेटलतीफी: यातायात विभाग द्वारा उल्लंघन के दो से तीन महीने बाद चालान भेजा जा रहा है, जिसमें मौके की जानकारी भी गलत होती है।
त्रुटिपूर्ण तस्वीरें: स्टेट बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता कोषराम साहू ने बताया कि दोपहिया पर दो लोग बैठे होने के बावजूद तीन सवारी (ट्रिपल लोडिंग) का गलत चालान भेजा जा रहा है।
बार-बार जुर्माना: एक ही वाहन चालक के नाम पर एक ही गलती के कई चालान आ रहे हैं, जिससे जनता मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान है।
मध्यम और गरीब वर्ग पर आर्थिक बोझ
प्रतिनिधिमंडल के सदस्य व अधिवक्ता विवेक तनवानी ने कहा कि रायपुर में बड़ी संख्या में गरीब, मजदूर और मध्यम वर्गीय नौकरीपेशा लोग रहते हैं। जिनकी मासिक आमदनी महज 10 से 20 हजार रुपये है, उनके लिए 5 से 10 हजार रुपये तक का भारी-भरकम चालान पटाना नामुमकिन है। शासन को इस विषय पर संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए।
'ड्रिंक एंड ड्राइव' कार्रवाई में सुधार की मांग
अधिवक्ता तनवानी ने शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई में भी पारदर्शिता और जन-जागरूकता लाने की मांग की है:
जागरूकता बोर्ड: सभी शराब दुकानों, भट्टियों और बार के बाहर अनिवार्य रूप से सूचना बोर्ड लगाया जाए। इस पर स्पष्ट लिखा हो कि शराब पीकर गाड़ी चलाने पर न्यूनतम 10,000 रुपये का जुर्माना होगा।
संक्रमण से बचाव: पुलिस द्वारा मदिरा परीक्षण (Breathalyzer Test) करने से पहले हर व्यक्ति के लिए पाइप (Straw) को बदला जाए, ताकि संक्रमण का खतरा न रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि नियमों का कड़ाई से पालन कराने से पहले आम जनता को जागरूक किया जाए और तकनीकी खामियों को तुरंत सुधारा जाए। अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल में नितिन भाड़ेकर, जगदीश सिंहा, पंकज धोते, चन्द्रलोक मिश्रा,मोनिका फर्नांडिस, रिया गाडिया, विदिशा सचदेव, विनोद सराफ, संगीता साहू, फरहान सिद्दीकी आदि मौजूद थे।
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