सतना जेल में डिप्टी जेलर को कैदी से हुआ प्यार, रचा ली शादी, इस तरह शुरू हुई प्रेम कहानी

 In Satna jail, the deputy jailer fell in love with an inmate and married him; this is how the love story began. big news latest news khabargali

सतना (खबरगली) सतना जेल की ऊंची दीवारों और सलाखों के पीछे जहां आमतौर पर अपराध, सजा और सन्नाटे की कहानियां जन्म लेती हैं, वहीं केन्द्रीय जेल सतना में एक ऐसी कहानी भी चुपचाप आकार ले रही थी, जिसने आखिरकार प्रेम और विश्वास की मिशाल बनकर सबको चौंका दिया। 

जेल के वारंट कार्यालय में तैनात डिप्टी जेलर ने इसी जेल के सजायाफ्ता रहे कैदी से ब्याह रचा अपने नए जीवन की शुरुआत कर ली। 5 मई को डिप्टी जेलर फिरोजा खातून और सजा माफ कैदी धर्मेन्द्र सिंह की शादी अब प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुकी है। वर्ष 2007 में छतरपुर जिले के चंदला में एक दिल दहलाने वाली घटना हुई थी। यहां के नगर परिषद उपाध्यक्ष कृष्णदत्त दीक्षित की हत्या कर दी गई थी और उनका शव दफन कर दिया गया था। पुलिस की जांच में चंदला निवासी धर्मेन्द्र सिंह इसका हत्याकांड का दोषी निकला और अदालत ने हत्यारा मानते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुना दी। 

धर्मेन्द्र को सजा काटने के लिए सतना केन्द्रीय जेल भेजा गया। धर्मेन्द्र यहां सजा के दौरान अच्छे चाल चरित्र का परिचय दे रहा था। लिहाजा उसे जेल दफ्तर के कार्यों में भी सहयोगी के तौर पर तैनात किया जाने लगा। उसकी समझ को देखते हुए जेल की वारंट शाखा में सहायक के काम में रख​ दिया गया। जहां वह कैदियों की आमद रिहाई संबंधी लिखा पढ़ी और दस्तावेज संभालने का काम करता था।

इस तरह शुरू हुई प्रेम कहानी

इसी बीच केन्द्रीय जेल सतना मे डिप्टी जेलर के रूप में फिरोजा खातून की तैनाती हुई जो रीवा जिले की मूल निवासी हैं। पटवारी रहते पीएससी परीक्षा क्रेक कर डिप्टी जेलर बनी फिरोजा को सतना जेल में वारंट शाखा का भी प्रभार दिया गया था। वारंट शाखा कार्यालय में फिरोजा कैदियों के आने जाने का रिकार्ड देखतीं और सहायक के रूप में उनकी मदद करता था कैदी धर्मेन्द्र। लगातार इस शाखा में काम करते करते डिप्टी जेलर फिरोजा और धर्मेन्द्र की मुलाकातें अपनत्व में बदलती गईं, बातें बढ़ने लगी तो अपनत्व में प्रेम का अंकुर फूटने लगा। धीरे-धीरे दोनों का प्रेम जेल की दीवारों के भीतर परवान चढ़ने लगा। समय के साथ रिश्ता इतना गहरा हो गया कि दोनों ने जिंदगी भर साथ रहने का फैसला कर लिया। लेकिन एक डिप्टी जेलर और कैदी का प्रेम अभी किसी के सामने नहीं आया था।

और आई रिहाई की बेला

इसी बीच अच्छे चाल चलन के कारण धर्मेन्द्र सिंह की गिनती सतना जेल में अच्छे कैदी के रूप में होने लगी थी। जेल के सभी अफसरों की नजर में उसकी छवि अच्छी थी। तीन साल पहले धर्मेन्द्र को तय प्रावधानों के तहत जेल प्रबंधन ने उसे जेल से रिहा कर दिया। लगभग 18 साल की उम्र में ही जेल की चहारदीवारी में कैद हो गया धर्मेन्द्र जब बाहर निकला तो सबकुछ अलग था। ऐसे में उसे जब तब जेल की कहानियां रह-रह कर याद आती थीं।

तब धर्मेन्द्र सतना में फिरोजा से मिलने पहुंच जाता था। यही मेल मिलाप अब लोगों की नजर में आने लगा था जो जेल की अंदर पूरी तरह छिपा हुआ था। जेल से बाहर आए हुए धर्मेन्द्र को तीन साल से ज्यादा हो गए थे। अब दोनों ने प्रेम के इस बंधन को शादी में बदलने का निर्णय ले लिया था।