छत्तीसगढ़ में खुलेंगी 27 नई पॉक्सो फास्ट ट्रैक कोर्ट, बच्चों के खिलाफ अपराध पर सख्त हुई सरकार, जल्द मिलेगा न्याय

 27 new POCSO fast-track courts will open in Chhattisgarh, the government has become strict on crimes against children, justice will be delivered soon. RAipur chhattisgarh hindi news khabargali

रायपुर (खबरगली) बच्चों और नाबालिगों के खिलाफ बढ़ते लैंगिक अपराधों पर सख्ती दिखाते हुए विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने राज्यभर में 27 नई पाक्सो फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना का रास्ता साफ कर दिया है। खास बात यह है कि इनका दायरा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि कोंडागांव, सरायपाली, बलरामपुर और अन्य आदिवासी व पिछड़े जिलों को भी इसमें शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य बच्चों से जुड़े लैंगिक अपराधों के मामलों में तेजी से सुनवाई कर लंबित प्रकरणों का जल्द निपटारा करना है, ताकि पीडि़तों को वर्षों तक अदालतों के चक्कर न काटने पड़ें। 

केंद्र पोषित श्रेणी में रायपुर में चार, बिलासपुर और रायगढ़ में दो-दो अदालतों सहित दुर्ग, कोरबा, जांजगीर-चांपा, राजनांदगांव, गरियाबंद, अंबिकापुर और बलरामपुर (रामनुजगंज) जैसे जिलों को शामिल किया गया है। वहीं राज्य पोषित बालोद, बलौदाबाजार, भाटापारा, बस्तर (जगदलपुर), धमतरी, कवर्धा (कबीरधाम), कोंडागांव, कोरबा (कटघोरा), बेमेतरा, मुंगेली, सारंगढ़ (रायगढ़) और सरायपाली (महासमुंद) शामिल हैं। उल्लेखनीय है विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने नई अदालतों के संबंध में 20 मई को अधिसूचना जारी कर दी है।

न्याय के लिए नहीं करना होगा लंबा सफर

सरकार का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आदिवासी और दूरस्थ इलाकों में पीडि़त परिवारों को सुनवाई के लिए दूसरे जिलों तक जाना पड़ता था, जिससे न्याय प्रक्रिया लंबी और कठिन हो जाती थी। अब स्थानीय स्तर पर विशेष अदालतें बनने से मामलों की सुनवाई में तेजी आने के साथ जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष के बीच बेहतर समन्वय भी संभव हो सकेगा। न्यायिक व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि फास्ट ट्रैक अदालतों के विस्तार से न केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होगी, बल्कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों में कानून का डर भी बढ़ेगा।

क्या है पाक्सो एक्ट

प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (पाक्सो) अधिनियम यानी 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के साथ यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012 एक ऐसा सख्त कानून है जो 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण, छेड़छाड़, और पोर्नोग्राफी जैसे अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। इस एक्ट के अंतर्गत स्पेशल और फॉस्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना की गई है। सजा के प्रावधानों में आजीवन कारावास, मृत्युदंड भी शामिल हैं।

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