छत्तीसगढ़ का गौरव: कोरिया के 1200 किसानों ने बदला भूजल स्तर, प्रधानमंत्री ने रेडियो पर की जमकर तारीफ
नई दिल्ली/कोरिया (खबरगली ) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 132वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के किसानों की गौरवगाथा साझा की। पीएम मोदी ने जल संरक्षण के क्षेत्र में कोरिया के किसानों द्वारा किए गए नवाचार की खुलकर सराहना करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बताया।पीएम ने बताया कि कैसे यहाँ के किसानों ने परंपरागत खेती के साथ-साथ जल संरक्षण की आधुनिक सोच को मिलाकर बंजर होती जमीन में नई जान फूँक दी है।
बारिश की बूंदों को सहेजने का अनोखा प्रयास
प्रधानमंत्री ने बताया कि कोरिया के किसानों ने एक बहुत ही सरल लेकिन असरदार तकनीक अपनाई है। यहाँ के किसानों ने अपने खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे तैयार किए हैं, जिससे बारिश का पानी बहने के बजाय सीधे जमीन के भीतर जा रहा है। इस पहल से न केवल भूजल स्तर (Groundwater level) में सुधार हुआ है, बल्कि खेती के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध हो रहा है।
1200 से अधिक किसानों ने अपनाई यह तकनीक
रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 1200 से ज्यादा किसान इस मॉडल को अपना चुके हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जहाँ कई क्षेत्र पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं, वहीं कोरिया के किसानों का यह सामूहिक प्रयास एक बड़ा बदलाव ला रहा है।
मनरेगा और जल शक्ति अभियान का दिखा असर
कोरिया के किसानों ने इस सफलता को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' और 'जल शक्ति अभियान' का भरपूर लाभ उठाया है। मनरेगा (MGNREGA) के तहत खेतों में छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे (Soak Pits) खोदकर बारिश के पानी को सहेजने का जो काम शुरू हुआ, उसने आज एक आंदोलन का रूप ले लिया है। जिले के 1200 से अधिक किसान अब इस मॉडल को अपना चुके हैं।
किसानों की जुबानी: "अब खेत में ही रुकता है सोना"
इस पहल से जुड़े स्थानीय किसानों का उत्साह देखते ही बनता है। एक प्रगतिशील किसान ने खुशी जाहिर करते हुए कहा: "पहले बारिश का पानी बहकर निकल जाता था और रबी की फसल के लिए हमारे पास पानी नहीं बचता था। पीएम साहब की प्रेरणा और सरकारी मदद से हमने सोखता गड्ढे बनाए। अब हमारे खेतों की नमी बनी रहती है और भूजल स्तर ऊपर आने से कुओं में भी पानी बढ़ गया है।"
कृषि विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का मानना
कार्यक्रम के दौरान मौजूद स्वास्थ्य मंत्री श्याम जायसवाल और क्षेत्रीय विधायक भैया लाल राजवाड़े ने कहा कि कोरिया का यह मॉडल अब 'सस्टेनेबल फार्मिंग' (टिकाऊ खेती) का प्रतीक बन गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक से न केवल सिंचाई की सुविधा बढ़ी है, बल्कि खाद का कम उपयोग होने से लागत में भी कमी आई है।सभी ने कोरिया के किसानों की इस वैश्विक पहचान पर खुशी जाहिर की और इस अभियान को और विस्तार देने का संकल्प लिया।
प्रधानमंत्री का संदेश: छोटे प्रयास, बड़ा बदलाव
पीएम मोदी ने देश के अन्य किसानों से भी कोरिया के इस मॉडल को समझने और अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं है, बल्कि यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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