बिलासपुर (खबरगली)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत इन दिनों छत्तीसगढ़ के बिलासपुर दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में स्वयंसेवकों को संबोधित किया। कार्यक्रम में 500 से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए। आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने संगठन की भूमिका, स्वयंसेवकों के महत्व, सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रहित और संघ की शाखाओं के विस्तार जैसे विषयों पर विचार रखे।
संघ स्वयंसेवकों से बड़ा है: मोहन भागवत
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा है, लेकिन संगठन हमेशा स्वयंसेवकों से बड़ा होता है। उन्होंने पानी का उदाहरण देते हुए संघ और स्वयंसेवकों के बीच संबंध को समझाया।
संगठन की ताकत हैं स्वयंसेवक
उन्होंने कहा कि प्रत्येक स्वयंसेवक संघ की पहचान और ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। संगठन की मजबूती सामूहिक प्रयासों, विचारों और निरंतर कार्य से बनती है। संघ का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ना है।
नफरत नहीं, सामाजिक सद्भाव है संघ का लक्ष्य
संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं है। उन्होंने प्रेम, आपसी विश्वास और सामाजिक सद्भाव के माध्यम से समाज को जोड़ने पर जोर दिया।
राष्ट्रहित सर्वोपरि, संवैधानिक दायरे में हों कार्य
डॉ. भागवत ने कहा कि किसी भी आंदोलन या सामाजिक गतिविधि का उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए। उन्होंने सभी कार्य संवैधानिक दायरे में रहकर किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके संदेश में राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सहयोग एवं अपनत्व बढ़ाने की बात प्रमुख रही।
एक साल में बढ़ीं संघ की हजारों नई शाखाएं
बौद्धिक वर्ग से पहले आयोजित बैठक में संघ की गतिविधियों और संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा की गई। दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले एक साल में देशभर में संघ की हजारों नई शाखाएं शुरू हुई हैं।
शाखा, कुटुंब और अपनत्व को मजबूत करने पर जोर
बैठक में संगठन की शाखाओं के विस्तार के साथ संपर्क अभियान जारी रखने की बात कही गई। इस दौरान संघ के तीन प्रमुख आधार—शाखा, कुटुंब और अपनत्व—को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। संघ की योजना में शाखाओं के माध्यम से स्वयंसेवकों को जोड़ने, परिवारों के साथ संपर्क बढ़ाने और समाज में आपसी संबंधों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
मोहन भागवत के कार्यक्रम में मीडिया और मोबाइल पर प्रतिबंध
बिलासपुर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम स्थल पर मीडिया के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाए जाने की जानकारी दी गई। वहीं, परिसर में प्रवेश से पहले उपस्थित लोगों के मोबाइल फोन भी जमा करा लिए गए थे। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली। निर्धारित नियमों के तहत आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया गया।
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