Gen-Z पर मोहन भागवत के बयान से गरमाई सियासत, अभिजीत दीपके बोले- ‘बीजेपी और PM मोदी भी सुनें संघ प्रमुख की बात’

Mohan Bhagwat's statement on Gen-Z has sparked a political firestorm, with Abhijeet Deepak saying, "BJP and PM Modi should also listen to the RSS chief's words." New Delhi, Khabargali

नई दिल्ली (खबरगली ) Gen-Z को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है। भागवत के बयान का स्वागत करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और NEET पेपर लीक विरोधी आंदोलन से चर्चा में आए अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संघ प्रमुख की बात मानने की अपील की है। दीपके ने कहा कि युवाओं और छात्रों को सिर्फ विरोध करने के कारण ‘एंटी नेशनल’ नहीं कहा जाना चाहिए।

Gen-Z पर भागवत के बयान को दीपके ने बताया अहम

अभिजीत दीपके ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि मोहन भागवत के बयान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Gen-Z को एंटी नेशनल नहीं समझा जाना चाहिए। उनका कहना है कि लोकतंत्र में युवाओं का अपनी बात रखना और सरकार के सामने सवाल उठाना उनका अधिकार है। दीपके ने कहा कि Gen-Z के युवाओं की कई शिकायतें और मुद्दे वास्तविक हैं। ऐसे में उनके विरोध को देश विरोधी नजरिए से देखने के बजाय उनकी बात सुनने और संवाद करने की जरूरत है।

‘बीजेपी वाले भी मोहन भागवत की बात सुनें’

अभिजीत दीपके ने अपने बयान में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर निशाने पर लेते हुए कहा कि मोहन भागवत संघ के प्रमुख हैं और बीजेपी के मार्गदर्शक माने जाते हैं। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि बीजेपी नेता भी संघ प्रमुख के संदेश को गंभीरता से लेंगे। दीपके ने कहा कि अगर युवा और छात्र अपने अधिकारों तथा मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें एंटी नेशनल कहना उचित नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस दृष्टिकोण को अपनाने की अपील की।

Gen-Z को लेकर क्यों छिड़ी है बहस?

Gen-Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में है। शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली में हुए आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके भी प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। अब उनका कहना है कि युवाओं के आंदोलनों को समझने के लिए संवाद जरूरी है, न कि उन्हें देश विरोधी बताना।

बीजेपी नेताओं के पुराने बयानों का भी किया जिक्र

दीपके ने आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े कुछ नेताओं ने Gen-Z को लेकर ऐसी टिप्पणियां की हैं, जिन्हें लेकर युवाओं में नाराजगी है। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कथित बयान और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की Gen-Z को ‘वायरस’ बताए जाने वाली टिप्पणी का भी जिक्र किया। दीपके का कहना है कि एक तरफ संघ प्रमुख युवाओं की शिकायतों को जायज बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी से जुड़े नेताओं के बयानों में अलग रुख दिखाई देता है। यही विरोधाभास अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।

मोहन भागवत ने Gen-Z को लेकर क्या कहा?

मोहन भागवत ने मुंबई में ‘इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स’ (IIMUN) के एक कार्यक्रम में Gen-Z और Gen Alpha पीढ़ी के युवाओं को संबोधित किया था। भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक वैध तरीका है, लेकिन इसका उद्देश्य समाज में बंटवारा पैदा करना नहीं बल्कि आम सहमति बनाने की दिशा में होना चाहिए। उन्होंने Gen-Z की शिकायतों को जायज बताते हुए युवाओं की ईमानदारी पर भरोसा जताया।

भागवत के बयान को क्यों माना जा रहा है महत्वपूर्ण?

भागवत का यह संदेश ऐसे समय आया है जब युवा वर्ग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज उठा रहा है। इसलिए उनके बयान को RSS की ओर से Gen-Z और Gen Alpha तक संवाद बढ़ाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। अब अभिजीत दीपके के बयान ने इस बहस को और राजनीतिक रंग दे दिया है। सवाल यह है कि क्या बीजेपी और उसके नेता संघ प्रमुख के इस संदेश को अपनाएंगे? आने वाले दिनों में Gen-Z को लेकर बीजेपी और RSS के बीच संवाद का यह मुद्दा सियासी चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है।

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