रायपुर (खबरगली ) देश में त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले शक्कर और गुड़ की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पूर्व संसदीय सचिव एवं छाया सांसद विकास उपाध्याय ने शक्कर की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई के कारण त्योहारों की मिठास फीकी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ने से शक्कर की उपलब्धता और कीमतों पर भी असर पड़ा है।
शक्कर की कीमत 70 रुपये किलो तक पहुंचने का दावा
विकास उपाध्याय के मुताबिक, बाजार में शक्कर की कीमत में तेजी देखने को मिल रही है। उनका दावा है कि एक ही दिन में शक्कर के दाम में करीब 10 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई और वर्तमान में कई जगहों पर शक्कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। उन्होंने कहा कि शक्कर की कीमत बढ़ने का असर केवल घरेलू बजट तक सीमित नहीं है, बल्कि चाय दुकानों, हलवाई, बेकरी और खाद्य सामग्री बनाने वाले कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। इन कारोबारियों के लिए लागत बढ़ने से तैयार खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ाने का दबाव बन रहा है।
गुड़ के दाम में भी तेजी
उपाध्याय ने कहा कि शक्कर के साथ गुड़ की कीमत में भी तेजी आई है। उनके अनुसार, कुछ समय पहले करीब 60 रुपये किलो बिकने वाला गुड़ अब लगभग 100 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ छोटे कारोबारियों की परेशानी भी बढ़ी है।
एथेनॉल उत्पादन और चीनी की उपलब्धता पर उठे सवाल
विकास उपाध्याय ने शक्कर की बढ़ती कीमत के पीछे एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के इस्तेमाल को भी एक कारण बताया। उन्होंने कहा कि गन्ने और चीनी के उत्पादन को लेकर बाजार में चिंता बढ़ने पर इसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई देता है। उन्होंने चीनी निर्यात के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि चार साल पहले देश से करीब 1.33 करोड़ टन चीनी का निर्यात होता था, जबकि अब निर्यात शून्य होने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात पर पाबंदियां लगाई गई हैं।
उपाध्याय ने कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर के बयान का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ठक्कर लंबे समय से एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
1 अगस्त 2026 से स्टॉक लिमिट का भी मुद्दा
उपाध्याय ने कहा कि सरकार ने देशभर में शक्कर के थोक कारोबारियों के लिए 1 अगस्त 2026 से स्टॉक लिमिट लागू करने का ऐलान किया है। इसके तहत थोक कारोबारी निर्धारित अवधि में तय मात्रा से अधिक शक्कर का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। उनका कहना है कि सरकार को शक्कर की कीमतों पर नियंत्रण के साथ-साथ घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
E20 पेट्रोल को लेकर भी सरकार पर निशाना
विकास उपाध्याय ने शक्कर की कीमत के मुद्दे के साथ E20 पेट्रोल को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में तकनीकी समस्याएं, माइलेज में कमी और इंजन से जुड़ी परेशानियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों को यदि बार-बार तकनीकी खराबी और रखरखाव की समस्या का सामना करना पड़ता है, तो इससे उनका खर्च बढ़ सकता है। उपाध्याय ने सरकार से E20 पेट्रोल के प्रभावों का गंभीरता से आकलन करने की मांग की।
रायपुर उपभोक्ता आयोग के फैसले का दिया उदाहरण
उपाध्याय ने रायपुर के एक उपभोक्ता मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद तकनीकी खराबी और मिसफायरिंग की शिकायत सामने आई थी। उनके मुताबिक, रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में पीड़ित उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी और संबंधित डीलर को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई कार उपलब्ध कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से प्रभावित उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए सरकार को प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए और वाहन मालिकों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए स्पष्ट नीति तैयार करनी चाहिए।
सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग
विकास उपाध्याय ने कहा कि बढ़ती महंगाई का सीधा असर आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। त्योहारों के समय शक्कर और गुड़ जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम बढ़ने से लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से शक्कर की कीमतों पर नियंत्रण, घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक और E20 पेट्रोल से जुड़ी उपभोक्ता शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की। प्रवक्ता अमित शर्मा (लल्लू) ने यह प्रेस रिलीज जारी की।
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