पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े संदिग्धों की तलाश, बस्तर, सरगुजा और दुर्ग जिले में मिले कनेक्शन

 Search underway for suspects linked to the Pakistani intelligence agency ISI; connections found in Bastar, Sarguja, and Durg districts. raipur chhattisarh hindi news khabargali

रायपुर (खबरगली) इंटेलिजेंस की टीम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के शहरी नेटवर्क से जुडे़ हुए लोगों की तलाश कर रही है। पिछले दिनों पकडे़ गए संदेही से मिले इनपुट के आधार पर मोबाइल नंबरों को खंगाला जा रहा है। उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के कनेक्शन को जांच के दायरे में लिया गया है। राज्य पुलिस के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि स्लीपर सेल से जुडे़ कुछ अन्य लोग खुफिया जानकारियां एकत्रित कर रहे है। इसे देखते हुए टीम को अलर्ट किया गया है। सरगुजा, बस्तर और दुर्ग जिले के कुछ इलाकों पर नजर रखी जा रही है। 

इससे जुडे़ हुए कुछ अन्य लोग भी जुडे़ हुए है। पहले भी भिलाई के फरीद नगर में रहने दो नाबालिग स्कूली बच्चों पकडे़ गए थे। इसके बाद से सोशल मीडिया और मोबाइल नंबरों को खंगाला जा रहा था। बता दें कि जांजगीर-चांपा पुलिस ने 21 जून को अकलतरा क्षेत्र से सेवक सिंह को गिरफ्तार किया था। उस पर देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। पूछताछ में पता चला कि वह पंजाब के तरन तारण जिले के पट्टी का रहने वाला है। यह क्षेत्र पाकिस्तान के बार्डर से सटा हुआ है।

किराएदारों का सत्यापन

राज्य पुलिस की टीम आईएसआई से जुडे़ आरोपी के पकडे़ जाने के बाद किराएदारों का वेरिफिकेशन कर रही है। साथ उनके दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। बताया जाता है कि नक्सलियों के सफाए के बाद उनके पास से बरामद मोबाइल और संदिग्ध दस्तावेज भी मिले थे। इसमें आंतकी कनेक्शन के साथ ही विदेशी फंडिग तक शामिल है। बता दें कि इसके पहले भी 2022 में कांकेर, 2023 में बिलासपुर, 2024 में रायपुर और 2025 में भिलाई में सिमी, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के लोग पकडे़ जा चुके है।

क्या होता है स्लीपर सेल

स्लीपर सेल मतलब आतंकी संगठन के ऐसे मेंबर जो आम लोगों की तरह रहकर नौकरी-धंधा करते हैं। मौका देखकर हमला करने, स्थानीय लोगों को उकसाने, फंडिग करने, सदस्य बनाने और प्रतिबंधित स्थानों की रेकी करना है। वहीं इसके जानकारी आकाओं तक पहुंचाना है। ताकि किसी भी क्षेत्र में अराजकता फैलाया जा सकें।

नंबरों की जांच

गिरफ्तार किए गए मोबाइल फोन में मिली जानकारियों के आधार पर पूरे मामले को खंगाला जा रहा है। साथ ही एक्सपर्ट के जरिए मोबाइल को डीकोड कर उसमें मिले नंबर, व्हाट्सऐप , टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जांच के दायरे में लिया गया है। फिलहाल पूरे मामले को संवेदनशील मामले हुए सतर्कता के साथ छानबीन की जा रही है।

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