रायपुर की गिरजा जलक्षत्रिय बनीं मिसाल: जिला कोर्ट परिसर में ‘Tea Express’ से दे रहीं 9 लोगों को रोजगार, दिव्यांगता को दी मात

Raipur's Girja Jalakshatriya sets an example: Providing employment to 9 people through 'Tea Express' in the district court premises, defeating disability, Lokesh Kavadia, Chairman of Disabled Finance and Development Corporation, Chhattisgarh, Khabargali

दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम की वित्तीय सहायता ने गिरजा के सपनों को नई उड़ान दी

रायपुर (खबरगली ) कहते हैं कि हौसले बुलंद हों, तो शारीरिक सीमाएं कभी भी सफलता के आड़े नहीं आतीं। इस बात को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सच कर दिखाया है एक प्रेरणादायक महिला ने। हम बात कर रहे हैं श्रीमती गिरजा जलक्षत्रिय की, जिन्होंने अपनी मेहनत, अटूट लगन और आत्मविश्वास के बल पर विपरीत परिस्थितियों को मात देकर एक सफल उद्यमी का सफर तय किया है। आज वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का एक चमकता हुआ दीप बन चुकी हैं।

दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम का संबल और ‘Tea Express’ की शुरुआत

आज से करीब एक वर्ष पहले, जब लोकेश कावडिया ने दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम में अध्यक्ष पद की कमान संभाली थी, तब शासन की योजनाओं को धरातल पर उतारने की शुरुआत हुई थी। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कर-कमलों से श्रीमती गिरजा जलक्षत्रिय को ₹2,70,000 का ऋण चेक प्रदान किया गया था। इस वित्तीय सहायता ने गिरजा के सपनों को नई उड़ान दी। इस पूंजी के सहारे उन्होंने रायपुर के अत्यंत व्यस्त जिला सत्र न्यायालय परिसर के पास “Tea Express” नाम से अपनी दुकान की शुरुआत की। आज यह टी-स्टॉल सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की एक जीवंत पाठशाला बन चुका है।

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दूसरों को रोजगार देकर खुद बन गईं अन्नदाता

गिरजा जलक्षत्रिय की यह सफलता सिर्फ उनकी अपनी तरक्की तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपने साथ 7 दिव्यांगजनों और 2 सामान्य नागरिकों (जिनमें से तीन लोग 80% तक दिव्यांग हैं) को अपने व्यवसाय से जोड़कर रोजगार उपलब्ध कराया है।

कुल रोजगार सृजन: 9 लोगों की टीम

विशेष फोकस: विशेष रूप से सक्षम (दिव्यांग) व्यक्तियों को प्राथमिकता वित्तीय अनुशासन: वे निगम से लिए गए ऋण का भुगतान भी पूरी नियमितता के साथ कर रही हैं, जो उनकी ईमानदारी और व्यावसायिक सूझबूझ को दर्शाता है। 

औचक निरीक्षण में दिखा सफलता का असली रंग

हाल ही में, दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावडिया विभागीय अधिकारियों के साथ औचक निरीक्षण पर निकले। इस दौरान उनका काफिला अचानक सत्र न्यायालय परिसर स्थित “Tea Express” पर रुका। वहाँ का नजारा देखकर अधिकारियों का दिल गदगद हो गया। जिला सत्र न्यायालय परिसर में वकीलों, वादकारियों और आम जनता की भारी भीड़ के बीच गिरजा और उनकी टीम पूरी मुस्तैदी से काम कर रही थी। यहाँ चाय के साथ-साथ पापड़ी चाट, झालमुड़ी और कई अन्य लजीज व्यंजन ग्राहकों को परोसे जा रहे थे। उनकी इस कार्यशैली को देखकर अध्यक्ष लोकेश कावडिया ने कहा कि गिरजा ने अपने अदम्य साहस से साबित कर दिया है कि दिव्यांगता कभी भी तरक्की की राह में रुकावट नहीं बन सकती। 

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डिजिटल इंडिया का संदेश और अधिकारियों की मौजूदगी

निरीक्षण के दौरान अध्यक्ष लोकेश कावडिया ने दुकान पर बैठकर चाय और नाश्ते का आनंद लिया। इस दौरान उन्होंने डिजिटल इंडिया अभियान को बढ़ावा देते हुए फोन-पे (PhonePe) के माध्यम से कुल ₹250 का ऑनलाइन भुगतान किया। इस प्रेरणादायक अवसर पर निगम के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे: श्री पंकज वर्मा (प्रबंध संचालक) श्री शरद तिवारी (महाप्रबंधक) श्री राजेश तिवारी (सलाहकार) श्री जितेन्द्र सिन्हा

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आत्मनिर्भरता की मिसाल

हर कदम पर साथ है निगम दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम यह संदेश देता है कि राज्य का प्रत्येक वह दिव्यांगजन जो अपने बलबूते पर जीवन में आगे बढ़ने का पक्का इरादा रखता है, शासन और निगम उसकी पीठ पर हमेशा चट्टान की तरह खड़े हैं। श्रीमती गिरजा जलक्षत्रिय की यह कहानी प्रदेश के हजारों युवाओं और विशेष रूप से सक्षम लोगों को यह सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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