तमिलनाडु मॉडल पर छत्तीसगढ़ में विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग, 80 हजार शिक्षकों को TET से राहत देने की अपील

Demand to convene a special assembly session in Chhattisgarh based on the Tamil Nadu model; appeal to exempt 80,000 teachers from the TET requirement. Latest news hindi news khabargali

रायपुर (खबरगली) तमिलनाडु विधानसभा में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर पारित किए गए शासकीय संकल्प के बाद छत्तीसगढ़ में भी शिक्षकों की मांग तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार से तमिलनाडु की तर्ज पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रदेश के करीब 80 हजार सहायक शिक्षकों और वरिष्ठ सेवारत शिक्षकों को TET की बाध्यता से राहत देने की मांग की है।

फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने TET को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सत्ता पक्ष और विपक्ष मिलकर विधानसभा में सर्वसम्मत शासकीय संकल्प पारित करें और केंद्र सरकार तथा राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) से नियमों में आवश्यक संशोधन की सिफारिश करें।

तमिलनाडु विधानसभा के फैसले को बताया मॉडल

फेडरेशन ने तमिलनाडु विधानसभा में पारित शासकीय संकल्प को छत्तीसगढ़ के लिए मॉडल बताया है। संगठन के अनुसार, तमिलनाडु विधानसभा में सत्ता पक्ष DMK और विपक्षी दलों सहित कांग्रेस, PMK और वामपंथी दलों ने शिक्षकों के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई। फेडरेशन का कहना है कि तमिलनाडु विधानसभा ने केंद्र सरकार और NCTE से RTE Act 2009 की धारा 23 में संशोधन करने की मांग की है, ताकि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की बाध्यता से स्थायी राहत मिल सके।

छत्तीसगढ़ के 80 हजार शिक्षकों के सामने संकट

रविन्द्र राठौर के अनुसार, छत्तीसगढ़ में करीब 80 हजार सहायक शिक्षक और शिक्षक संवर्ग ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2010 से पहले शिक्षाकर्मी या अन्य संवर्गों में हुई थी और बाद में उनका स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। इन शिक्षकों ने पिछले 15 से 25 वर्षों के दौरान प्रदेश के ग्रामीण और सुदूर वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। फेडरेशन का दावा है कि TET की अनिवार्यता को पिछली नियुक्तियों पर लागू किए जाने की व्याख्या के कारण इन शिक्षकों की पदोन्नति, समयमान-क्रमोन्नति वेतनमान और सेवा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

फेडरेशन ने उठाया नियुक्ति की मूल शर्तों का मुद्दा

फेडरेशन का तर्क है कि जब इन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, तब उन्होंने उस समय लागू सभी शैक्षणिक और व्यावसायिक योग्यताएं पूरी की थीं। उस समय TET को नियुक्ति की अनिवार्य शर्त के रूप में लागू नहीं किया गया था। संगठन का कहना है कि सेवा के अंतिम पड़ाव में वर्षों से कार्यरत शिक्षकों पर नई पात्रता शर्त लागू करने से उनके सेवा हित प्रभावित हो सकते हैं। फेडरेशन इसे प्राकृतिक न्याय और सेवा सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर मुद्दा बता रहा है।

सरकार से चार प्रमुख मांगें

फेडरेशन ने छत्तीसगढ़ सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं।

पहली मांग: राज्य सरकार तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाए।

दूसरी मांग: तमिलनाडु की तर्ज पर सत्ता पक्ष और विपक्ष की सहमति से सर्वसम्मत शासकीय संकल्प पारित किया जाए।

तीसरी मांग: प्रस्ताव को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और NCTE को भेजकर RTE नियमों में आवश्यक संशोधन की औपचारिक सिफारिश की जाए।

चौथी मांग: जब तक केंद्र सरकार की ओर से नियमों में स्पष्ट छूट नहीं मिलती, तब तक अनुभवी शिक्षकों की पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर लगी कथित रोक को विभागीय स्तर पर हटाया जाए।

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