रायपुर के युवा को मिली राष्ट्रीय स्तर पर पहचान, रीजनिंग गुरु योगेन्द्र साहू को खान सर ने किया समान्नित

Raipur youth gets national recognition, reasoning guru Yogendra Sahu honored by Khan Sir hindi news hindi news latest news big news raipur news khabargali

रायपुर (खबरगली) रायपुर के ग्राम सेमरिया के प्रतिभाशाली युवा योगेन्द्र साहू को उनके उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद् खान सर द्वारा सम्मानित किया गया है। प्रयागराज में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें रीजनिंग विषय में उनकी विशेष दक्षता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे विद्यार्थियों के मार्गदर्शन हेतु यह सम्मान प्रदान किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में गौरव का माहौल है। योगेन्द्र साहू वर्तमान में खान ग्लोबल स्टडीज़ में रीजनिंग गुरु के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 

यह सम्मान न केवल उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की प्रेरणादायक कहानी भी प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच योगेन्द्र साहू को उनके उत्कृष्ट शिक्षण कार्य और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने में योगदान के लिए सराहा गया।

माता है गांव की सरपंच 

योगेन्द्र साहू की प्रारंभिक शिक्षा उनके अपने गांव सेमरिया में ही हुई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने निरंतर मेहनत और लगन के बल पर अपनी शिक्षा का स्तर ऊंचा किया और आज एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान से जुड़कर हजारों विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि भी सामाजिक सेवा से जुड़ा रहा है। उनके पिता नंदू लाल साहू अपने समय में सरपंच पद पर रह चुके हैं और उनकी माता ओम बती साहू जो वर्तमान में ग्राम सेमरिया की सरपंच है। यही कारण है कि योगेन्द्र साहू न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी भली-भांति निभा रहे हैं।

पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल 

ग्राम सेमरिया सहित पूरे रायपुर क्षेत्र में इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों ने इसे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि योगेन्द्र साहू की सफलता यह दर्शाती है कि यदि दृढ़ संकल्प और मेहनत हो, तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

आज योगेन्द्र साहू न केवल एक सफल शिक्षक हैं, बल्कि उन युवाओं के लिए एक उदाहरण भी हैं जो छोटे गांवों से निकलकर बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी सफलता में बाधा नहीं बनती, यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो।


 

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