राजनीतिक संपर्कों और करोड़ों के लेन-देन की जानकारी देने की कही बात
रायपुर (खबरगली ) महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में कथित प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर के एक नए दावे ने जांच की दिशा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ओमान में हिरासत में मौजूद चंद्राकर ने कथित तौर पर भारत लौटने से पहले अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उसका दावा है कि अगर उसे पर्याप्त सुरक्षा और निष्पक्ष माहौल दिया जाता है, तो वह जांच एजेंसियों के सामने महादेव सट्टा नेटवर्क से जुड़े कई अहम राज खोल सकता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चंद्राकर ने कथित तौर पर नेटवर्क से जुड़े राजनीतिक संपर्कों, पैसों के लेन-देन और विदेशों में मौजूद संपत्तियों के बारे में जानकारी देने की इच्छा जताई है। उसने भारत पहुंचने के बाद जांच एजेंसियों और अदालत के सामने बयान दर्ज कराने की बात भी कही है।
‘भारत की जेल में जान को खतरा’, सुरक्षा की मांग
सौरभ चंद्राकर की ओर से कथित तौर पर सबसे गंभीर चिंता उसकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर जताई गई है। उसका कहना है कि भारत लौटने और जेल में रखे जाने के बाद उसकी जान को खतरा हो सकता है।
परिवार की सुरक्षा को लेकर भी जताई आशंका
रिपोर्टों के अनुसार, चंद्राकर ने केवल अपनी सुरक्षा की मांग नहीं की है, बल्कि अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उसका दावा है कि महादेव नेटवर्क से जुड़े प्रभावशाली लोगों की वजह से उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाया जा सकता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए चंद्राकर की ओर से लगाए गए आरोपों को फिलहाल उसके दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
सुरक्षा के बदले बड़े खुलासे का दावा
चंद्राकर का कथित प्रस्ताव इस पूरे मामले को नया एंगल देता है। वह जांच में सहयोग करने की इच्छा जताते हुए दावा कर रहा है कि सुरक्षा मिलने पर वह महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क की अंदरूनी जानकारी जांच एजेंसियों को दे सकता है।
किन जानकारियों का दावा?
रिपोर्टों में चंद्राकर के हवाले से जिन संभावित जानकारियों का जिक्र है, उनमें शामिल हैं— कथित राजनीतिक संपर्कों की जानकारी, करोड़ों रुपये के लेन-देन से जुड़ी जानकारी, विदेशों में मौजूद कथित संपत्तियों का विवरण, नेटवर्क से जुड़े लोगों और गतिविधियों की जानकारी, इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्यों से संबंधित जानकारी, हालांकि, इन दावों की असली अहमियत तभी सामने आएगी जब जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के साथ इनकी स्वतंत्र पुष्टि करेंगी।
भारत लौटने के बाद क्या होगा?
चंद्राकर भारत आने के बाद सक्षम जांच एजेंसियों और अदालत के सामने अपना बयान दर्ज कराने की इच्छा जताने की बात सामने आई है। उसकी मांग है कि उसे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों से अलग रखा जाए और पूछताछ के दौरान उस पर किसी तरह का दबाव न बनाया जाए।
न्यायिक निगरानी की भी मांग
रिपोर्टों के अनुसार, उसने पूछताछ की न्यायिक निगरानी और इलेक्ट्रॉनिक तथा दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग भी की है। लेकिन सुरक्षा या जांच में सहयोग की पेशकश अपने आप में किसी आरोपी को कानूनी छूट नहीं देती। उसके खिलाफ दर्ज मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अपने स्तर पर जारी रहेगी।
ओमान में हिरासत से भारत लाने की कोशिश
सौरभ चंद्राकर को जुलाई 2026 में ओमान में भारतीय एजेंसियों के अनुरोध और इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। भारत की ओर से उसे वापस लाने के लिए प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक से जुड़े प्रमुख प्रमोटरों में शामिल रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले अपनी जांच में चंद्राकर और रवि उप्पल को महादेव ऑनलाइन बुक का मुख्य प्रमोटर बताया था। एजेंसी के मुताबिक नेटवर्क के जरिए अवैध सट्टेबाजी और अपराध की कमाई को विभिन्न माध्यमों से संचालित किए जाने के आरोप हैं।
महादेव केस में पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में जांच एजेंसियां लंबे समय से कार्रवाई कर रही हैं। मार्च 2026 में ED ने मामले में करीब ₹1,700 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच करने की जानकारी दी थी। इनमें दुबई और नई दिल्ली स्थित संपत्तियां शामिल थीं। वहीं जुलाई 2026 में CBI ने भी मामले में कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और चंद्राकर तथा रवि उप्पल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्त साक्ष्य रिकॉर्ड पर रखे।
क्या सौरभ चंद्राकर के दावे से खुलेगा पूरा नेटवर्क?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सौरभ चंद्राकर भारत लौटता है और जांच एजेंसियों के सामने विस्तृत बयान देता है, तो क्या उसके दावे महादेव सट्टा नेटवर्क की उन कड़ियों तक पहुंचा सकते हैं जो अभी जांच के दायरे में हैं? फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि उसके पास वास्तव में कितनी महत्वपूर्ण जानकारी है। जांच एजेंसियां उसके दावों को उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन से मिलाकर ही परखेंगी। एक तरफ भारत लाने की प्रक्रिया, दूसरी तरफ सुरक्षा का दावा और तीसरी तरफ नेटवर्क के कथित राजनीतिक व वित्तीय संपर्कों का खुलासा करने की पेशकश—सौरभ चंद्राकर का यह दावा महादेव केस की जांच में एक नया मोड़ जरूर पैदा करता है।
सौरभ चंद्राकर की ओर से सुरक्षा के बदले महादेव नेटवर्क के कथित राज खोलने की पेशकश की खबर ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि उसके दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।आने वाले समय में भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया और उसके संभावित बयान से यह स्पष्ट हो सकता है कि उसके पास जांच एजेंसियों को देने के लिए वास्तव में कितनी अहम जानकारी है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में सुरक्षा, राजनीतिक संपर्कों और नेटवर्क से जुड़े खुलासों संबंधी बातें उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में सामने आए दावों पर आधारित हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय से ही निर्धारित होगी।
- Log in to post comments
