रायपुर (खबरगली ) गणेशोत्सव को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने राज्य सरकार को विस्तृत गाइडलाइन सौंपी है। सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा को ज्ञापन सौंपकर इन दिशा-निर्देशों को पूरे प्रदेश में लागू कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि प्रस्तावित गाइडलाइन लागू होने से गणेशोत्सव के दौरान सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गरिमा, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस पहल पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया है।
गणेशोत्सव के लिए सिविल सोसायटी की प्रमुख गाइडलाइन
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने गणेशोत्सव के दौरान मूर्ति स्थापना, पंडाल, जुलूस, ध्वनि नियंत्रण और विसर्जन को लेकर कई सुझाव दिए हैं।
PoP और प्लास्टिक की मूर्तियों पर प्रतिबंध की मांग
सिविल सोसायटी ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) और प्लास्टिक से बनी गणेश प्रतिमाओं के निर्माण एवं बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। संगठन ने सुझाव दिया है कि बाजार में प्राकृतिक मिट्टी, पारंपरिक शिल्पकला और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से बनी प्रतिमाओं को ही प्रोत्साहित किया जाए। प्रस्तावित गाइडलाइन में नियमों का उल्लंघन करने वाले विक्रेताओं पर 10 हजार से 50 हजार रुपये तक अर्थदंड लगाने और जब्त प्रतिमाओं के निस्तारण का खर्च संबंधित विक्रेता से वसूलने का सुझाव दिया गया है।
गणेश पंडालों में सुरक्षा और मर्यादा पर जोर
सिविल सोसायटी ने पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ सांस्कृतिक मर्यादा बनाए रखने पर भी जोर दिया है।
नशे की हालत में पंडाल में प्रवेश पर रोक का सुझाव
गाइडलाइन में नशे की अवस्था में किसी व्यक्ति को पंडाल में प्रवेश नहीं देने का सुझाव दिया गया है। संगठन ने आयोजकों, सुरक्षाकर्मियों और स्वयंसेवकों के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की बात कही है। नशे की हालत में पाए जाने वाले लोगों को पुलिस के सुपुर्द करने का भी सुझाव दिया गया है।
अश्लील गानों और फूहड़ नृत्य पर कानूनी कार्रवाई की मांग
सिविल सोसायटी ने गणेश पंडालों में अश्लील गानों के प्रसारण और फूहड़ नृत्य पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की है। संगठन के मुताबिक, ऐसे मामलों में आयोजन समिति की जिम्मेदारी तय कर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
CCTV और अग्निशमन यंत्र अनिवार्य करने का सुझाव
प्रत्येक गणेश पंडाल में पर्याप्त संख्या में CCTV कैमरे और चालू हालत में अग्निशमन यंत्र रखने का सुझाव भी गाइडलाइन में दिया गया है। संगठन का कहना है कि इससे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।
गणेश विसर्जन जुलूस और ध्वनि नियंत्रण को लेकर सुझाव
गणेश प्रतिमाओं के स्वागत एवं विसर्जन जुलूस को लेकर भी सिविल सोसायटी ने कई दिशा-निर्देश प्रस्तावित किए हैं। नशे में जुलूस में शामिल होने वालों पर कार्रवाई की मांग* संगठन ने विसर्जन और स्वागत जुलूस में नशे की हालत में शामिल होने वालों पर कड़ी निगरानी रखने का सुझाव दिया है। प्रेस विज्ञप्ति में पुलिस द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों का मौके पर अल्कोहल टेस्ट किए जाने की व्यवस्था का भी प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर अश्लीलता, उपद्रव और अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
निर्धारित डेसिबल और समय सीमा का पालन
गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया गया है। संगठन ने निर्धारित डेसिबल स्तर और समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है। अनंत चतुर्दशी पर बड़े गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का सुझाव* सिविल सोसायटी ने बड़ी गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी को एक निर्धारित विसर्जन दिवस रखने का सुझाव दिया है। छोटी प्रतिमाओं के विसर्जन को परंपरा के अनुसार करने की बात कही गई है।
चिन्हित स्थानों पर ही हो विसर्जन
गाइडलाइन में सुझाव दिया गया है कि गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन केवल स्थानीय प्रशासन और नगर निगम द्वारा पूर्व निर्धारित एवं अधिसूचित स्थलों पर ही किया जाए। संगठन ने विसर्जन जुलूस को शाम 6 बजे से शुरू कर मध्यरात्रि 12 बजे तक समाप्त कराने का सुझाव दिया है। समयसीमा और आयोजन की मर्यादा बनाए रखने की जिम्मेदारी आयोजन समितियों पर तय करने की मांग की गई है।
प्रशासन और पुलिस से सहयोग की अपील
छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने पुलिस एवं प्रशासन से गणेशोत्सव के दौरान नियमित गश्त और प्रस्तावित दिशा-निर्देशों के पालन की निगरानी करने का आग्रह किया है। साथ ही स्वयंसेवक दलों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है।
डॉ. कुलदीप सोलंकी ने जताया विश्वास
सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने उम्मीद जताई कि यदि इन सुझावों को प्रदेश स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो गणेशोत्सव का पर्व सुरक्षित, अनुशासित, पर्यावरण-अनुकूल और जनहितकारी वातावरण में संपन्न कराया जा सकेगा।
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