रायपुर (खबरगली ) राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर, मठपुरैना में नेत्र स्वास्थ्य और नेत्रदान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र ने विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को आंखों की देखभाल, दृष्टि दोष, आंखों की गंभीर बीमारियों और नेत्रदान के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि आंखें प्रकृति का अनमोल उपहार हैं। इनके माध्यम से व्यक्ति अपने आसपास की दुनिया को देखता, सीखता और जीवन का आनंद लेता है। समय पर जांच, उचित उपचार और जागरूकता के जरिए दृष्टि हानि के कई कारणों को रोका जा सकता है।
मोबाइल और कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल से आंखों पर असर
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से हो सकती हैं कई समस्याएं डॉ. मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल गैजेट का अत्यधिक उपयोग आंखों के लिए नई चुनौती बन गया है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना और कंप्यूटर विजन सिंड्रोम जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने स्क्रीन इस्तेमाल करने वालों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी। इसके तहत हर 20 मिनट बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना चाहिए। इसके साथ ही बार-बार पलकें झपकाने, पर्याप्त रोशनी में काम करने और स्क्रीन से उचित दूरी बनाए रखने पर भी जोर दिया।
बच्चों में बढ़ रहा दृष्टि दोष सही समय पर नेत्र जांच जरूरी
डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि निकट दृष्टि, दूर दृष्टि और एस्टिग्मैटिज्म जैसे दृष्टि दोष बच्चों और युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं। नियमित नेत्र परीक्षण कराकर सही नंबर का चश्मा लगाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चों में जन्म से ही आंखों से संबंधित विकृतियां या जन्मजात दोष हो सकते हैं। जन्म के बाद समय पर नेत्र परीक्षण कराने से कई समस्याओं का सफल उपचार संभव है।
विटामिन ए की कमी से आंखों को नुकसान
पौष्टिक आहार से आंखों को रखें स्वस्थ डॉ. मिश्र ने बताया कि बच्चों में विटामिन ए की कमी रतौंधी और कॉर्निया को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इससे बचने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, पपीता, आम, दूध और अंडे जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना चाहिए। उन्होंने आंखों में होने वाले बैक्टीरियल, वायरल और फंगल संक्रमण को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। आंखों में लालिमा, दर्द, पानी आना या दृष्टि कम होने जैसी समस्या होने पर खुद से दवा लेने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से सलाह लेने की बात कही।
मोतियाबिंद और ग्लूकोमा को लेकर रहें सतर्क
40 वर्ष के बाद नियमित आंखों की जांच जरूरी
डॉ. मिश्र के अनुसार बढ़ती उम्र में मोतियाबिंद अंधत्व का एक प्रमुख कारण है, लेकिन आधुनिक शल्य चिकित्सा से इसका सफल उपचार संभव है। वहीं कांचबिंदु यानी ग्लूकोमा को उन्होंने गंभीर नेत्र रोग बताया। ग्लूकोमा शुरुआती दौर में बिना स्पष्ट लक्षणों के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से आंखों की जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर का भी आंखों पर असर
रेटिना की जांच को नजरअंदाज न करें
डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप का सीधा प्रभाव आंखों के पर्दे यानी रेटिना पर पड़ सकता है। समय पर जांच और उपचार नहीं मिलने पर स्थायी दृष्टि हानि का खतरा हो सकता है। उन्होंने रेटिनल डिटैचमेंट यानी पर्दा उखड़ने की स्थिति को मेडिकल इमरजेंसी बताया। अचानक आंखों के सामने चमक दिखाई देना, काले धब्बे या उड़ते हुए कण नजर आना अथवा दृष्टि पर पर्दा गिरने जैसा अनुभव होना इसके चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल नेत्र चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
पटाखे, रसायन और नुकीली वस्तुओं से आंखों की सुरक्षा जरूरी
बच्चों और कामगारों को विशेष सावधानी की सलाह
डॉ. मिश्र ने बताया कि बच्चों की आंखों में चोट खिलौने, पेंसिल, तीर-कमान और अन्य नुकीली वस्तुओं से लग सकती है। वहीं वयस्कों में सड़क दुर्घटना, फैक्ट्री में काम, वेल्डिंग, एसिड, चूना और अन्य रसायनों के कारण आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है। उन्होंने दीपावली के दौरान पटाखे, बम और रॉकेट तथा होली में गुलाल और रंगों से आंखों की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतने और आवश्यकतानुसार सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करने की सलाह दी। रसायन आंख में चले जाने पर तुरंत साफ पानी से आंख को धोकर अस्पताल पहुंचना चाहिए।
नेत्रदान महादान, दो लोगों को मिल सकती है रोशनी
मृत्यु के बाद नेत्रदान से किसी के जीवन में लौट सकती है रोशनी
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के दौरान डॉ. दिनेश मिश्र ने नेत्रदान के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद नेत्रदान के माध्यम से दो कॉर्नियल दृष्टिहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकती है। उन्होंने समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि नेत्रदान एक महान मानव सेवा है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लौटाई जा सकती है।
स्वस्थ आंखों के लिए इन बातों का रखें ध्यान
नियमित नेत्र परीक्षण और संतुलित आहार अपनाएं
डॉ. मिश्र ने लोगों से नियमित नेत्र परीक्षण, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, आंखों की स्वच्छता, सुरक्षात्मक उपाय और समय पर उपचार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना, नियमित आंखों की जांच कराना और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना दृष्टि की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। कार्यक्रम को संस्था के सचिव देवेंद्र अग्रवाल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और समाज में नेत्र स्वास्थ्य तथा नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
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