अब कलेक्टर देंगे भारतीय नागरिकता! 8 राज्यों में बदले नियम, जानें क्या है नया प्रावधान

Collectors will now grant Indian citizenship! Rules have changed in 8 states, learn about the new provisions, Khabargali

नई दिल्ली (खबरगली ) केंद्र सरकार ने भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 के तहत कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जिला कलेक्टरों को नागरिकता अधिनियम की धारा 6B के तहत नागरिकता आवेदनों की जांच और निर्णय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। नए नियम का उद्देश्य नागरिकता आवेदनों की प्रक्रिया को अधिक सरल और तेज करना बताया गया है। यह प्रावधान खास तौर पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए पात्र गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक आवेदकों के लिए लागू होगा।

नागरिकता देने का अधिकार अब कलेक्टर के पास

नए नियमों के तहत संबंधित जिला कलेक्टर नागरिकता के लिए आवेदन प्राप्त करने, दस्तावेजों की जांच करने, आवश्यक सत्यापन कराने और पात्र पाए जाने पर नागरिकता देने की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

धारा 6B के तहत होगी प्रक्रिया

यह व्यवस्था नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B के तहत पंजीकरण या प्राकृतिककरण के लिए किए जाने वाले आवेदनों पर लागू होगी। आवेदन मिलने के बाद कलेक्टर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से फॉर्म IX में पावती जारी करेंगे। कलेक्टर आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच करने के साथ जरूरत पड़ने पर उसकी पात्रता और उपयुक्तता से संबंधित आवश्यक जांच भी कर सकेंगे।

किन 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा नियम?

नए प्रावधान के तहत नागरिकता प्रक्रिया में कलेक्टरों को अधिकार छह राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में दिया गया है।

इन क्षेत्रों में लागू होगी नई व्यवस्था गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हालांकि असम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों को इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है।

कलेक्टर की क्या होगी जिम्मेदारी?

नियमों में बदलाव के बाद जिला कलेक्टर नागरिकता प्रक्रिया के महत्वपूर्ण अधिकारी होंगे। वे आवेदन प्राप्त करने के बाद दस्तावेजों की जांच करेंगे और आवश्यकता के अनुसार आवेदक की पात्रता का सत्यापन करेंगे।

कलेक्टर करेंगे ये प्रमुख काम

नागरिकता आवेदन प्राप्त करना। आवेदक के दस्तावेजों की जांच करना आवश्यक होने पर पात्रता और उपयुक्तता का सत्यापन करना। आवेदक को नागरिकता अधिनियम की दूसरी अनुसूची के अनुसार निष्ठा की शपथ दिलाना। धारा 6B के तहत पात्रता निर्धारित करना। जांच से संतुष्ट होने पर भारतीय नागरिकता प्रदान करना। यदि आवेदक को पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए उपस्थित नहीं होता है, तो उसका आवेदन खारिज किया जा सकता है।

पहले किसके पास था नागरिकता देने का अधिकार?

अब तक सीएए के तहत नागरिकता देने की प्रक्रिया में सशक्त समिति और जिला स्तरीय समिति की भूमिका थी। नए नियमों के बाद निर्धारित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इन समितियों के पास लंबित धारा 6B के आवेदन संबंधित जिला कलेक्टरों को ट्रांसफर किए जाएंगे।

आवेदकों को अब कहां जमा करना होगा आवेदन?

नए प्रावधान के तहत पात्र आवेदकों को धारा 6B के अंतर्गत पंजीकरण या प्राकृतिककरण के लिए आवेदन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संबंधित क्षेत्र के जिला कलेक्टर के पास जमा करना होगा।

नागरिकता से जुड़े फॉर्म में भी बदलाव

केंद्र सरकार ने नागरिकता नियमों के कई प्रावधानों और आवेदन फॉर्म में भी बदलाव किया है। नियम 14 और 15 में सशक्त समिति के साथ जरूरत के अनुसार कलेक्टर को शामिल किया गया है। इसी तरह नियम 38 में नामित अधिकारी के साथ कलेक्टर का उल्लेख किया गया है। अनुसूची-1 में दिए गए Forms IIA, IIIA, IVA, VA, VIA, VIIA और VIIIA में भी आवश्यक संशोधन किए गए हैं।

लंबित आवेदन भी होंगे ट्रांसफर

निर्धारित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामान्य रूप से रहने वाले आवेदकों के आवेदन अब संबंधित कलेक्टर को जमा किए जाएंगे। वहीं सशक्त समिति और जिला स्तरीय समिति के पास लंबित धारा 6B के आवेदन भी संबंधित कलेक्टरों को स्थानांतरित किए जाएंगे।

19 अगस्त के आदेश से भी जुड़ा है बदलाव

गृह मंत्रालय ने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 18 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह अधिसूचना जारी की है। नागरिकता के मूल नियम फरवरी 2009 में अधिसूचित किए गए थे और इससे पहले इनमें 18 मई 2026 को संशोधन किया गया था। इसके अलावा गृह मंत्रालय ने 19 अगस्त 2026 को अलग आदेश जारी कर निर्धारित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सशक्त समिति तथा जिला स्तरीय समिति के पास लंबित धारा 6B के आवेदनों को संबंधित कलेक्टरों को ट्रांसफर करने का प्रावधान किया है।

केंद्र सरकार के इस बदलाव से निर्धारित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में धारा 6B के तहत भारतीय नागरिकता के आवेदन की प्रक्रिया जिला स्तर पर अधिक सीधे तरीके से पूरी हो सकेगी। कलेक्टर अब आवेदन प्राप्त करने से लेकर दस्तावेजों की जांच, पात्रता निर्धारण और नागरिकता प्रदान करने तक की महत्वपूर्ण प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।