शकुंतला फाउंडेशन के माध्यम से स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और दिव्यांगजनों के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाया
रायपुर (खबरगली) समाज के उपेक्षित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली श्रीमती स्मिता सिंह आज नारी शक्ति की एक सशक्त पहचान बन चुकी हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए वे किसी 'वरदान' से कम नहीं हैं। सरकारी शिक्षिका की सुरक्षित नौकरी को त्यागकर सेवा की कठिन राह चुनने वाली स्मिता सिंह ने शकुंतला फाउंडेशन के माध्यम से स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और दिव्यांगजनों के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं।
पिता के निधन ने बदली जीवन की दिशा
स्मिता सिंह के सेवा पथ पर चलने की कहानी बेहद भावुक है। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में अपने कर्मठ पिता को खोने के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि वे किसी और को इलाज की कमी से नहीं मरने देंगी। इसी संकल्प का परिणाम है कि आज वे 5000 से अधिक मरीजों के लिए दवा, ऑपरेशन, काउंसलिंग और मेडिकल उपकरणों की व्यवस्था कर चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनके माता- पिता आदिवासी समुदाय के लिए शुरू से सेवा कार्य कर रहे थे तब हम छात्रों को निःशुल्क ट्यूशन करा रहे थे।
नन्हे दिलों की धड़कन और 'आशादीप' की लौ
स्मिता सिंह के अथक प्रयासों से असंख्य 'बाल हृदय रोगियों' को नया जीवन मिला है। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के बच्चों के लिए भी वे निरंतर सक्रिय हैं। चंदेरी की एक नेत्रहीन बालिका का LV प्रसाद नेत्रालय, हैदराबाद में इलाज कराना उनके समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उनकी 'आशादीप' मुहिम के जरिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग गोबर और मिट्टी के उत्पाद बनाकर स्वावलंबन की ओर बढ़ रहे हैं, जिन्हें स्मिता सिंह स्वयं बाजार उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने खबरगली को बताया कि सेवा कार्य करते हुए भिलाई मदर टेरेसा के दिव्यांग आदित्य के आपरेशन के लिए भिलाई में बहुत सारे अस्पताल गए पर कहीं मदद नहीं मिली फिर रामकृष्ण केयर अस्पताल के डाक्टर संदीप दवे से भरपूर सहयोग मिला, उन्होंने आपरेशन का पूरा खर्च वहन किया।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए समर्पित जीवन
हौसला मुहिम: इसके माध्यम से वे महिलाओं के लिए निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित कर रही हैं और सेनेटरी पैड वितरित कर स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही हैं।
बुजुर्गों का सहारा: सड़कों पर असहाय अवस्था में पड़े बुजुर्गों का पुनर्वास सुनिश्चित करने के साथ-साथ, उन्होंने अपने निजी व्यय से वृद्धाश्रम हेतु भूखंड खरीदा है और अब वहां भवन निर्माण के लिए प्रयासरत हैं।
वैश्विक स्तर पर मिली पहचान
बस्तर जैसे संवेदनशील और सुदूरवर्ती क्षेत्रों से सेवा कार्य शुरू करने वाली स्मिता सिंह को उनके कार्यों के लिए देश-विदेश में सराहा गया है। उन्हें कनाडा और दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों द्वारा प्रतिष्ठित 'भारत गौरव सम्मान' से नवाजा जा चुका है। कोविड काल में रायपुर जिला प्रशासन के साथ मिलकर किए गए उनके जागरूकता अभियान के लिए भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
श्रीमती स्मिता सिंह का जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो एक व्यक्ति समाज के हजारों चेहरों पर मुस्कान ला सकता है।
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