रायपुर (खबरगली) छत्तीसगढ़ अब सिर्फ धरती से नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से भी अपने खेत, जंगल और खदानों पर नजर रखने की तैयारी कर रहा है। राजधानी रायपुर में तैयार हो रहा हाई-रिजॉल्यूशन मल्टीस्पेक्ट्रल सैटेलाइट प्रदेश में कृषि, वन और खनन क्षेत्र की निगरानी में नई तकनीकी मदद दे सकता है। इसकी मदद से फसलों में बदलाव और उनकी स्थिति पर नजर रखने के साथ वन संपदा व जैव विविधता की निगरानी, जीव-जंतुओं की पहचान, अवैध खनन की निगरानी और जमीन के भीतर दुर्लभ खनिजों की पहचान जैसे काम किए जा सकेंगे।
लूनर स्पेस एजेंसी ने तैयार किया मॉडल
छत्तीसगढ़ की पहली सैटेलाइट कंपनी लूनर स्पेस एजेंसी ने इसके इंजीनियरिंग मॉडल को तैयार कर लिया है और अब इसे इसरो की मंजूरी का इंतजार है। कंपनी ने 2027 में सैटेलाइट की लॉन्चिंग का लक्ष्य रखा है। कंपनी के अनुसार भविष्य में निजी क्षेत्र या राज्य सरकार की जरूरत के मुताबिक सैटेलाइट में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए पेलोड और तकनीकी उपयोग जोड़े जा सकते हैं। यानी एक ही सैटेलाइट से अलग-अलग क्षेत्रों के लिए डेटा जुटाने और उसका विश्लेषण करने की संभावनाएं रहेंगी।
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इस सेक्टर में मिल सकती है सरकार को मदद
सर्विलांस, ट्रैफिक-यातायात, सूचना-प्रौद्योगिकी, गृह, लोक निर्माण, जल संसाधन, पर्यटन एवं संस्कृति, उद्योग एवं पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, जियो टैगिंग आदि।
इसरो में प्रशिक्षण प्राप्त डॉ. रवि टेम्भरे की अगुवाई में तैयारी
राजधानी के साइंस कॉलेज से पढ़े और इसरो में प्रशिक्षण प्राप्त कंपनी के सीईओ डॉ. रवि टेम्भरे ने सैटेलाइट का इंजीनियरिंग मॉडल तैयार किया है। अब मॉडल को बेंगलुरु स्थित इसरो मुख्यालय के अंतरिक्ष भवन भेजा जाएगा। वहां परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया के बाद आगे की अनुमति का निर्णय होगा।
नक्सल ऑपरेशन में इसरो के सैटेलाइट से मदद
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग विभागों को वर्तमान में इसरो के सैटेलाइट से मदद मिल रही है। सूत्रों के मुताबिक बस्तर में नक्सली गतिविधियों और कई इससे जुड़े बड़े ऑपरेशन में भी इसरो के सैटेलाइट्स की मदद ली गई थी।
जंगल और खदानों की भी होगी निगरानी
सैटेलाइट का उपयोग केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा। वन क्षेत्रों में जैव विविधता, वन संपदा और जीव-जंतुओं की निगरानी के साथ खनन क्षेत्रों में बदलाव और अवैध खनन की पहचान के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। कंपनी के मुताबिक जमीन के भीतर दुर्लभ खनिजों की संभावित पहचान के लिए भी सैटेलाइट से प्राप्त डेटा उपयोगी हो सकता है।
स्पेस टेक्नोलॉजी का इकोसिस्टम बनाने की तैयारी
लूनर स्पेस का उद्देश्य केवल सैटेलाइट लॉन्च करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में स्पेस टेक्नोलॉजी का इकोसिस्टम तैयार करना है। कंपनी के मुताबिक इससे प्रदेश के युवाओं को स्पेस टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट डिजाइनिंग, पेलोड, डेटा एनालिसिस और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
लूनर स्पेस एजेंसी के सैटेलाइट के बारे में
1. 100 फीसदी मेक इन इंडिया, इंजीनियरिंग मॉडल के बाद कंपनी के फ्लाइट मॉडल को भी राजधानी में तैयार किया जाएगा।
2. धरती से 550-600 किमी. ऊपर से नजर रखेगा।
3. सोलर विंग्स के साथ बैटरी को उपग्रह को तीन साल तक अंतरिक्ष में स्थापित रखेगा।
4. इसरो से अनुमति में देरी होने पर लांचिंग के लिए स्पेस-एक्स से भी बातचीत की तैयारी।
5. इसरो से अनुमति की स्थिति में श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से लांचिंग होगा।
6. समुद्र और विमानों की रेडियो फ्रेंकवेंसी गतिविधि को डिफेंस सेक्टर के लिए डेटा उपलब्ध कराना।
7. 11 लोगों की टीम, जिसमें 5 रिटायर्ड वैज्ञानिक शामिल हैं।
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